पंचकूला , 21 सितंबर 2026 । राजस्थान के खैरथल-तिजारा नगर परिषद में चेयरमैन पद के चुनाव से ठीक पहले हरियाणा के पंचकूला में सियासी हलचल तेज हो गई। कांग्रेस का आरोप है कि हिमाचल प्रदेश से तिजारा लौट रहे कांग्रेस-समर्थित करीब 18 पार्षदों को चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाजा के पास रोक लिया गया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने पिंजौर थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के अनुसार, पार्षदों को करीब पांच घंटे बाद अंबाला के शाहाबाद से छोड़ा गया। इसके बाद उनका काफिला तिजारा के लिए रवाना हुआ।
ताजा जानकारी के अनुसार करीब पांच घंटे बाद पार्षदों को अंबाला/शाहाबाद क्षेत्र से छोड़े जाने की बात सामने आई है। इसके बाद सभी पार्षद तिजारा के लिए रवाना हो गए। काबिलेजिक्र है कि तिजारा नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं और चेयरमैन पद के लिए बहुमत का आंकड़ा 18 है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार 31 निर्दलीय, 3 भाजपा और 1 कांग्रेस पार्षद निर्वाचित हुए हैं।
पंचकूला पुलिस ने हिरासत से किया इनकार
मामले में पंचकूला पुलिस का पक्ष कांग्रेस के आरोपों से अलग है। पुलिस ने पार्षदों को हिरासत में लेने से इनकार किया है। एसीपी राम कुमार के मुताबिक, पुलिस को पार्षदों के लापता होने की सूचना मिली थी और उनकी लोकेशन अंबाला या शाहाबाद के आसपास होने की जानकारी सामने आई थी।
पुलिस का कहना है कि वह यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि पार्षदों के साथ वास्तव में क्या हुआ और उन्हें कौन लोग अपने साथ ले गए।
पिंजौर थाने के बाहर रातभर चला प्रदर्शन
पार्षदों को रोके जाने की खबर के बाद राजस्थान कांग्रेस के नेता पंचकूला पहुंचे। कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने पिंजौर थाने के बाहर धरना दिया। कालका के पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी समेत कई नेता प्रदर्शन में शामिल हुए।
कांग्रेस की मांग थी कि पार्षदों को रोकने का आधार स्पष्ट किया जाए और यदि वे समय पर तिजारा नहीं पहुंच पाते हैं तो मतदान के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
तिजारा में 35 पार्षद, बहुमत का आंकड़ा 18
तिजारा नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। चेयरमैन के चुनाव में बहुमत के लिए 18 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में 18 पार्षदों का समूह चुनाव से ठीक पहले चर्चा के केंद्र में आ गया।
उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार परिषद में 31 निर्दलीय, 3 भाजपा और 1 कांग्रेस पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसी वजह से 18 पार्षदों की मौजूदगी और मतदान में उनकी भागीदारी चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
पार्षदों को रोके जाने के विवाद के बीच तिजारा चेयरमैन चुनाव की प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति बदलती दिखाई दी। एक रिपोर्ट के अनुसार मतदान का समय पहले सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित था, जिसे बाद में दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक किए जाने की जानकारी सामने आई।
वहीं, कांग्रेस इस मामले को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट भी पहुंची। कोर्ट ने चुनाव पर सीधे रोक लगाने के बजाय भिवाड़ी एडीएम को घटनाक्रम की रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को देने का निर्देश दिया। इसके बाद चुनाव कराया जाए या नहीं, इस पर निर्णय आयोग के स्तर पर होना था।
आरोप और पुलिस के पक्ष में अंतर
पूरे घटनाक्रम में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं। कांग्रेस का कहना है कि उसके समर्थन वाले पार्षदों को पुलिस ने रोका, जबकि पंचकूला पुलिस ने हिरासत में लेने से इनकार किया है। बाद में पार्षदों के अंबाला से तिजारा के लिए रवाना होने की जानकारी सामने आई।
इसलिए मामले की वास्तविक परिस्थितियों और पार्षदों को किसने तथा किन परिस्थितियों में रोका, इसे लेकर अंतिम स्थिति जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।