यूपी कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी खींचतान
अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम की अलग-अलग रणनीति से हाईकमान की बढ़ी चिंता
लखनऊ, 11 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस के सामने एक नई संगठनात्मक चुनौती खड़ी होती दिख रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और AICC के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के बीच काम करने के तरीके और संगठन से जुड़े फैसलों को लेकर मतभेद की खबरें सामने आई हैं। यह स्थिति ऐसे समय बनी है जब कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने और समाजवादी पार्टी के साथ संभावित चुनावी तालमेल को लेकर रणनीति तैयार कर रही है।
पंजाब जैसी स्थिति की चर्चा
उत्तर प्रदेश कांग्रेस में भी पंजाब जैसी स्थिति की चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, पंजाब में पार्टी के नेताओं के बीच चल रहे अंतरकलह को सुलझाने के लिए आलाकमान को दखल देना पड़ा था। इसी दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस के भीतर से भी तकरार की खबरें सामने आने लगी। आरोप है कि राजेंद्र पाल गौतम यूपी कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष की तरह काम कर रहे हैं। दावा यह भी किया जा रहा है कि अजय राय के कामकाज के तरीकों को प्रभारी समझ ही नहीं पा रहे हैं। ऐसे में वह अपने स्तर पर निर्णय लेते दिख रहे हैं।
अध्यक्ष पद को लेकर भी चर्चा तेज
अंदरूनी मतभेदों के बीच प्रदेश कांग्रेस संगठन में संभावित बदलाव की चर्चा भी महत्वपूर्ण हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार राजेंद्र पाल गौतम की ओर से मुस्लिम नेता नदीम जावेद के नाम पर विचार किए जाने की चर्चा ने भी पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ाई। इससे अजय राय और गौतम के बीच रणनीतिक मतभेद की अटकलों को और बल मिला।
हालांकि, किसी संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए इसे फिलहाल पार्टी के भीतर चल रही चर्चा और संभावनाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की भूमिका अहम
मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान भी उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक हालात पर नजर रख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राजेंद्र पाल गौतम के साथ बैठक कर उत्तर प्रदेश कांग्रेस से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
प्रियंका गांधी भी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश के पार्टी मामलों में सक्रिय रही हैं। ऐसे में अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम के बीच तालमेल बनाए रखना हाईकमान के लिए अहम होगा। कांग्रेस यदि चुनाव से पहले संगठनात्मक बदलाव करती है तो उसका सीधा असर प्रदेश में पार्टी की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
पहले पंजाब, अब यूपी ने बढ़ाई चिंता
उत्तर प्रदेश में उभर रही यह स्थिति कांग्रेस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल में पंजाब में भी पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान सामने आई थी। पंजाब में हाईकमान ने हस्तक्षेप करते हुए सचिन पायलट को नया प्रदेश प्रभारी बनाया, जिसके बाद अलग-अलग गुटों के बीच स्थिति को सामान्य करने की कोशिश हुई।
अब उत्तर प्रदेश में भी चुनावी तैयारियों के बीच संगठनात्मक मतभेद सामने आना कांग्रेस के लिए चुनौती माना जा रहा है। यूपी देश का सबसे बड़ा विधानसभा चुनावी राज्य है और यहां प्रदर्शन का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ता है।
सपा के साथ गठबंधन भी बड़ी चुनौती
कांग्रेस के सामने सिर्फ अंदरूनी संगठनात्मक समीकरण ही चुनौती नहीं हैं। 2027 विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीति भी महत्वपूर्ण है। 2024 लोकसभा चुनाव में SP-कांग्रेस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को बड़ा झटका दिया था। अब दोनों दल विधानसभा चुनाव में उस प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करेंगे।
ऐसे में कांग्रेस के लिए जरूरी होगा कि प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच स्पष्ट तालमेल रहे। यदि संगठन के भीतर ही रणनीति को लेकर मतभेद बने रहते हैं तो उसका असर सीटों के चयन, उम्मीदवारों की घोषणा और जमीनी अभियान पर पड़ सकता है।
2027 से पहले कांग्रेस के सामने क्या बदलेगा?
उत्तर प्रदेश में भाजपा भी चुनावी तैयारियों में काफी सक्रिय है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 115 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष फोकस करते हुए विकास परियोजनाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों को तेज किया है। ऐसे समय में कांग्रेस को अपने संगठन और चुनावी संदेश को मजबूत करने की जरूरत होगी।
अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम के बीच सामने आई खींचतान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस के पास चुनाव से पहले संगठन को एकजुट करने के लिए सीमित समय है। अब देखना होगा कि हाईकमान दोनों नेताओं के बीच समन्वय कैसे स्थापित करता है और प्रदेश संगठन में क्या बदलाव किए जाते हैं। फिलहाल यह साफ है कि यूपी कांग्रेस के लिए 2027 की लड़ाई सिर्फ भाजपा और सपा से मुकाबले की नहीं, बल्कि अपने संगठन के भीतर तालमेल कायम रखने की भी परीक्षा बनती जा रही है।