यात्रियों की जेब काटकर ऐश की जिंदगी, 20 लाख तक महीना कमाते थे शातिर; फ्लाइट से बदलते थे शहर
लखनऊ , 10 सितंबर2026 । लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन और आसपास यात्रियों को निशाना बनाने वाले एक अंतरराज्यीय जेबकतरा गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। क्राइम ब्रांच और SOG की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस पूछताछ में गिरोह के काम करने के तरीके और उनकी जीवनशैली को लेकर कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह जेबकटी और चोरी के जरिए कभी-कभी एक महीने में करीब 20 लाख रुपये तक की कमाई कर लेता था और पकड़े जाने से बचने के लिए लगातार शहर बदलता रहता था।
चारबाग स्टेशन के पास से 5 गिरफ्तार
एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने बताया कि आरोपी महाराष्ट्र के अहमदनगर निवासी संदीप सुधाकर तिजोरी, सोनभद्र के धोरावल निवासी अरविंद गौतम, महाराष्ट्र के नासिक निवासी कुनाल विलास सिरपाठ, मुंबई के तिलकनगर कुर्ला निवासी जावेद अख्तर और गोंडा के बेलवा निवासी सोनू को मंगलवार रात करीब 11 बजे चारबाग रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया गया।
चारबाग स्टेशन बना था गिरोह का प्रमुख ठिकाना
पुलिस के अनुसार आरोपी चारबाग रेलवे स्टेशन और आसपास के भीड़भाड़ वाले इलाकों में यात्रियों की रेकी करते थे। गिरोह के सदस्य बाकायदा प्लेटफॉर्म टिकट खरीदकर स्टेशन के अंदर प्रवेश करते थे, जिससे उन पर किसी तरह का शक न हो। इसके बाद वे यात्रियों के बीच घुल-मिल जाते और भीड़ का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम देते थे।
ट्रेन के जनरल कोच इनका प्रमुख निशाना थे। आरोपी सामान्य यात्रियों की तरह डिब्बे में बैठते और मौका मिलते ही यात्रियों की जेब से नकदी और कीमती सामान पार कर देते थे। इसके अलावा ऑटो और ई-रिक्शा में सफर करने वाले यात्रियों को भी निशाना बनाया जाता था।
पानी और सामान बेचने वालों की आड़ में रेकी
जांच में पुलिस को पता चला कि गिरोह का नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम करता था। गिरोह से जुड़े कुछ लोग रेलवे स्टेशन पर पानी, गुटखा या अन्य सामान बेचने वाले लोगों की तरह रहते थे। इनकी मदद से भीड़ में संभावित शिकार की पहचान और रेकी की जाती थी। इसके बाद दूसरे सदस्य मौका देखकर यात्री की जेब साफ कर देते थे।
इस तरीके से गिरोह यात्रियों के बीच सामान्य गतिविधि का हिस्सा दिखाई देता था। यही वजह थी कि वारदात के दौरान आसपास मौजूद लोगों को भी कई बार शक नहीं होता था।
चोरी के पैसे से महंगे फ्लैट और हवाई सफर
इस गिरोह की सबसे हैरान करने वाली बात इसकी कमाई और जीवनशैली बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह कभी-कभी एक महीने में करीब 20 लाख रुपये तक की कमाई कर लेता था। चोरी की रकम से आरोपी महंगे किराये के मकानों में रहते थे और सामान्य जेबकतरों से बिल्कुल अलग आलीशान जीवन जीने की कोशिश करते थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी एक शहर में ज्यादा समय तक नहीं रुकते थे। वारदात के बाद ठिकाना बदलने के लिए वे कई बार हवाई जहाज से यात्रा करते थे। इस तरह महंगी यात्रा का इस्तेमाल पुलिस की निगरानी से बचने और तेजी से एक शहर से दूसरे शहर पहुंचने के लिए किया जाता था।
महाराष्ट्र से दिल्ली और यूपी तक नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क केवल लखनऊ तक सीमित नहीं था। गिरोह के तार महाराष्ट्र के मुंबई, नासिक और अहमदनगर से लेकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक जुड़े मिले हैं। अलग-अलग राज्यों के आरोपी मिलकर शहर बदल-बदलकर यात्रियों को निशाना बनाते थे।
गिरफ्तार आरोपियों में महाराष्ट्र के अहमदनगर निवासी 35 वर्षीय संदीप सुधाकर तिजोरे को पुलिस ने गिरोह का कथित सरगना बताया है। उसके अलावा नासिक के कुनाल विलास सिरसाठ, मुंबई के जावेद अख्तर, सोनभद्र के अरविंद गुप्ता और गोंडा के सोनू को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
1.24 लाख रुपये और स्कूटी बरामद
लखनऊ पुलिस की कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 24 हजार 700 रुपये नकद और एक स्कूटी बरामद की गई है। पुलिस के अनुसार बरामद रकम का संबंध सैरपुर, दुबग्गा और जानकीपुरम थानों में दर्ज चोरी के तीन मामलों से सामने आया है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि उन्होंने लखनऊ के अलावा दूसरे शहरों में कितनी वारदातें की हैं। साथ ही उन लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है, जो गिरोह के लिए रेकी या नए सदस्यों को जोड़ने का काम करते थे।
2009 से आपराधिक रिकॉर्ड की जांच
पुलिस के अनुसार कथित सरगना संदीप तिजोरे का महाराष्ट्र के रेलवे थानों में वर्ष 2009 से आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस उसके पुराने मामलों और दूसरे राज्यों में दर्ज मुकदमों की जानकारी जुटा रही है। इस जांच से गिरोह की पुरानी गतिविधियों और उसके नेटवर्क के विस्तार का पता चल सकता है।
फिलहाल पुलिस का ध्यान इस बात पर है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर दूसरे राज्यों में सक्रिय गिरोह के सदस्यों तक कैसे पहुंचा जाए। साथ ही पुलिस ऐसे यात्रियों से भी संपर्क करने की अपील कर रही है, जो हाल के दिनों में ट्रेन, ऑटो या ई-रिक्शा में जेबकटी का शिकार हुए हैं।
यात्रियों को भी सतर्क रहने की जरूरत
चारबाग जैसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों पर रोजाना हजारों यात्री आते-जाते हैं। भीड़ में जेबकतरों के लिए यात्रियों का ध्यान भटकाना आसान हो जाता है। ऐसे में यात्रियों को सफर के दौरान मोबाइल, पर्स, नकदी और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने के साथ-साथ अनजान लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है।
लखनऊ में इस गिरोह की गिरफ्तारी ने यह भी साफ किया है कि जेबकटी अब केवल छोटी-मोटी चोरी तक सीमित नहीं रह गई है। संगठित गिरोह इसके जरिए बड़े पैमाने पर कमाई कर रहे हैं और राज्यों के बीच लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे हैं। पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की अगली चुनौती इस पूरे नेटवर्क की बाकी कड़ियों तक पहुंचना है।