नई दिल्ली, 10 सितंबर2026 । दिल्ली में कॉलेज और यूनिवर्सिटी छात्रों की सुरक्षा और उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर दिल्ली पुलिस ने एक नई पहल शुरू की है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश के बाद पुलिस अधिकारियों को छात्रों से सीधे संवाद करने और उनकी शिकायतों को समझने के निर्देश दिए गए हैं। खास तौर पर पीजी, किराये के मकानों और छात्र आवासों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को अभियान के केंद्र में रखा गया है।
एलजी के निर्देश पर थानों के SHO जानेंगे समस्याएं
पुलिस का फोकस कॉलेज, यूनिवर्सिटी, पीजी और उन आवासों पर रहेगा, जहां बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स रहते हैं। अधिकारियों को लोकल लेवल पर छात्रों से सीधे बातचीत कर उनकी चिंताओं को समझने और असुरक्षा की वजहों का आकलन करने को कहा गया है।
SHO और ACP करेंगे छात्रों से सीधी बातचीत
नई पहल के तहत उन इलाकों में पुलिस का आउटरीच बढ़ाया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में कॉलेज और यूनिवर्सिटी छात्र रहते हैं। संबंधित थानों के SHO और सब-डिविजन स्तर पर तैनात ACP छात्रों से नियमित बातचीत करेंगे। इस दौरान सुरक्षा, स्थानीय अपराध, उत्पीड़न, महिलाओं की सुरक्षा, पीजी और किराये के मकानों से जुड़े विवादों जैसी समस्याओं की जानकारी ली जाएगी।
पुलिस का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर समझकर उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय करना भी है। जिन मामलों में नगर निगम या किसी अन्य नागरिक एजेंसी की भूमिका होगी, वहां पुलिस संबंधित विभाग के साथ मिलकर कार्रवाई सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी।
सत्य निकेतन हादसे के बाद बढ़ी चिंता
यह पहल दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्र आवास की इमारत गिरने की दर्दनाक घटना के बाद सामने आई है। हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी और इसके बाद राजधानी के कई छात्र इलाकों में पीजी और किराये की इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए। सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी निजी पीजी और किराये के कमरों में रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ा है।
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने पीजी हब में इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट और छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। सुरक्षित और किफायती छात्र आवास की कमी का मुद्दा दिल्ली हाई कोर्ट तक भी पहुंच चुका है।
दिल्ली पुलिस की इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा छात्रों और पुलिस के बीच भरोसा मजबूत करना भी है। अक्सर पीजी या किराये के मकानों में रहने वाले छात्र स्थानीय स्तर की छोटी-बड़ी समस्याओं को लेकर पुलिस तक पहुंचने में संकोच करते हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारियों द्वारा सीधे संवाद करने से शिकायतों की जानकारी समय रहते मिल सकती है।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि छात्रों से बातचीत केवल औपचारिक गतिविधि न बने, बल्कि वास्तविक समस्याओं पर फॉलो-अप किया जाए। LG के निर्देशों के अनुसार इस पहल को पुलिस के आउटरीच और कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग अभियान के तौर पर भी प्रचारित किया जाएगा।
20 सितंबर तक देनी होगी एक्शन टेकन रिपोर्ट
अभियान को लेकर पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है। रिपोर्ट में यह बताया जाना है कि छात्रों से क्या समस्याएं सामने आईं और उनके समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए। इस तरह पुलिस प्रशासन केवल संवाद तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर समस्याओं के समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
पीजी में रहने वाले छात्रों पर खास फोकस
दिल्ली में बड़ी संख्या में विद्यार्थी कॉलेज और यूनिवर्सिटी परिसरों के आसपास पीजी और किराये के मकानों में रहते हैं। ऐसे आवासों में सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, भवन की स्थिति, आपातकालीन निकास, स्थानीय अपराध और मकान मालिकों से जुड़े विवाद जैसे मुद्दे सामने आते रहे हैं।
सत्य निकेतन हादसे के बाद इन समस्याओं को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया है। छात्र संगठनों और अन्य पक्षों की ओर से भी सुरक्षित हॉस्टल और पीजी व्यवस्था की मांग उठ रही है। दिल्ली सरकार छात्र आवासों को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए पीजी नियमन की दिशा में भी काम कर रही है।
छात्रों की शिकायतों पर अब तेज कार्रवाई की उम्मीद
नई पहल से उम्मीद है कि छात्रों को अपनी सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं के लिए पुलिस तक पहुंचने में आसानी होगी। खासकर उन इलाकों में जहां बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से आए विद्यार्थी रहते हैं, वहां स्थानीय पुलिस और छात्रों के बीच बेहतर संपर्क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
दिल्ली पुलिस का यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब छात्र आवासों की सुरक्षा, पीजी की निगरानी और सुरक्षित रहने की व्यवस्था राजधानी में बड़ा मुद्दा बन चुकी है। अब देखना होगा कि छात्रों के साथ होने वाला यह सीधा संवाद कितनी प्रभावी कार्रवाई में बदलता है और जमीनी स्तर पर उन्हें इसका कितना फायदा मिलता है।