नई दिल्ली/मॉस्को, 08 सितंबर2026 । रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS सम्मेलन से पहले क्रेमलिन ने पुतिन की भारत यात्रा की पुष्टि की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक, यह दौरा भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत आएंगे। 11 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS नेताओं की बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक होगी।
रूस के राष्ट्रपति ऑफिस क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस मुलाकात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि भारत को रूस अपना रणनीतिक साझेदार मानता है और दोनों देशों के रिश्ते उसके लिए बेहद अहम हैं।
उन्होंने बताया कि भारत और रूस के बीच ज्यादातर भुगतान अब दोनों देशों की अपनी-अपनी करेंसी में हो रहा है। इससे पहले पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत आए थे।
रक्षा और ऊर्जा पर हो सकती है बड़ी बातचीत
मोदी-पुतिन वार्ता में रक्षा सहयोग अहम मुद्दा हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार भारत की ओर से रूस के Su-57 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान से जुड़ी तकनीक और सहयोग पर भी चर्चा की संभावना है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा और नए परमाणु संयंत्रों से जुड़े सहयोग पर भी बातचीत होने की खबरें हैं।
दोनों देशों के बीच व्यापार और भुगतान व्यवस्था भी महत्वपूर्ण विषय है। BRICS के संदर्भ में रूस ने विभिन्न भुगतान माध्यमों के लिए खुलेपन की बात कही है। क्रेमलिन ने यह भी कहा है कि रूस का उद्देश्य जबरन ‘डॉलर से दूरी’ बनाना नहीं है।
दिल्ली में जुटेंगे BRICS के बड़े नेता
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में रूस के अलावा चीन समेत BRICS के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इस बार का सम्मेलन वैश्विक व्यापार, आर्थिक सहयोग, तकनीक, ऊर्जा, सतत विकास और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की कोशिश BRICS को विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यावहारिक आर्थिक सहयोग के मंच के तौर पर मजबूत करने की है।
पुतिन की यात्रा क्यों अहम?
पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक राजनीति में रूस, चीन, अमेरिका और पश्चिमी देशों के बीच संबंध लगातार चर्चा में हैं। ऐसे माहौल में भारत की रूस और अन्य BRICS देशों के साथ बातचीत उसकी रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पुतिन और मोदी की बैठक पर खास नजर इसलिए भी रहेगी क्योंकि इसमें दोनों देशों के पारंपरिक रक्षा संबंधों के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और भविष्य के रणनीतिक सहयोग के नए क्षेत्रों पर बातचीत हो सकती है। क्रेमलिन ने भी पुतिन की यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर बताया है।