नई दिल्ली, 05 सितंबर2026 । भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को ICICI Bank में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99% तक करने की मंजूरी दे दी है। यह अनुमति बैंक की पेड-अप शेयर कैपिटल या वोटिंग राइट्स में कुल 9.99% तक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए है।
ICICI बैंक ने शेयर मार्केट फाइलिंग में इस बात की जानकारी दी है। बैंक के मुताबिक, RBI की ओर से जारी मंजूरी पत्र 4 सितंबर 2026 को रात 9:09 बजे प्राप्त हुआ। यह अनुमति मिलने के बाद अब LIC अगले एक साल के भीतर बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेगी।
1 साल की समयावधि तय, वरना रद्द होगी मंजूरी
फाइलिंग में बताया गया है कि यह मंजूरी एक सीमित समय सीमा के साथ दी गई है। यदि LIC मंजूरी पत्र जारी होने की तारीख (4 सितंबर 2026) से एक साल के भीतर इस हिस्सेदारी का अधिग्रहण पूरा नहीं कर पाती है, तो यह अनुमति रद्द हो जाएगी। यह खरीद सरकारी नियमों और कानूनी शर्तों को पूरा करने पर ही तय होगी।
अभी LIC की हिस्सेदारी कितनी है?
LIC पहले भी ICICI Bank की बड़ी शेयरधारकों में रही है। जनवरी 2026 में बाजार में शेयर बेचने के बाद LIC की हिस्सेदारी 6.737% से घटकर 4.731% रह गई थी। अब RBI की नई मंजूरी के बाद कंपनी के पास अपनी हिस्सेदारी को करीब 10% तक बढ़ाने का विकल्प है।
करीब 10% हिस्सेदारी का क्या मतलब?
किसी बड़े निजी बैंक में करीब 10% हिस्सेदारी LIC के लिए रणनीतिक निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। LIC देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है और उसके पास बड़े पैमाने पर निवेश योग्य फंड मौजूद हैं। ICICI Bank में हिस्सेदारी बढ़ने से बैंक के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में LIC की भूमिका और मजबूत हो सकती है।
हालांकि, RBI की मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि LIC ने तत्काल 9.99% हिस्सेदारी खरीद ली है। यह केवल उसे निर्धारित सीमा तक हिस्सेदारी हासिल करने की नियामकीय अनुमति देती है।
ICICI Bank की मजबूत स्थिति
ICICI Bank देश के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल है। हाल के वर्षों में बैंक ने डिजिटल बैंकिंग, रिटेल लोन, कॉरपोरेट बैंकिंग और डिपॉजिट जैसे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। ऐसे में बैंक में लंबी अवधि का निवेश LIC के लिए वित्तीय पोर्टफोलियो के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब LIC की कई बड़े बैंकों में हिस्सेदारी को लेकर बाजार में चर्चा है। अगस्त 2026 में RBI ने LIC को HDFC Bank में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99% तक करने की मंजूरी दी थी।
इससे संकेत मिलता है कि LIC बड़े बैंकिंग संस्थानों में अपने निवेश को रणनीतिक तरीके से बढ़ाने के विकल्पों पर काम कर रही है। हालांकि हर निवेश का अंतिम फैसला कंपनी की निवेश रणनीति और बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
निवेशकों की नजर LIC और ICICI Bank पर
RBI की मंजूरी के बाद अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि LIC वास्तव में ICICI Bank में कितनी अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदती है और खरीदारी किस तरीके से की जाती है। बड़े संस्थागत निवेशक की ओर से संभावित खरीदारी शेयर की मांग और बाजार धारणा को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि, केवल RBI की मंजूरी के आधार पर शेयर की कीमत में भविष्य की दिशा तय करना उचित नहीं होगा। बैंक के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, बाजार की स्थिति और LIC की वास्तविक खरीदारी जैसे कई कारक महत्वपूर्ण रहेंगे।