नई दिल्ली, 04 सितंबर2026 । दिल्ली की लोहार बस्ती में फुटपाथ और सार्वजनिक रास्ते पर कथित अतिक्रमण को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक फुटपाथ पर कब्जे को बनाए रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
संबंधित ढांचे फुटपाथ और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बने हैं
हाई कोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और उसके सामने रखी गई तस्वीरों पर गौर किया। कोर्ट ने पहली नजर में पाया कि संबंधित ढांचे फुटपाथ और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बने हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार,
2 सार्वजनिक जमीन, बरसाती पानी की नालियों और GTK रोड पर PWD के राइट ऑफ वे के हिस्से पर भी अतिक्रमण का आरोप है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि संबंधित सार्वजनिक जगह का इस्तेमाल कुछ व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इनमें लोहे के बर्तन बेचने जैसी गतिविधियां भी शामिल थीं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि फुटपाथ का उद्देश्य पैदल चलने वाले लोगों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है। यदि फुटपाथ पर अस्थायी या स्थायी ढांचे खड़े कर दिए जाते हैं, तो इससे आम लोगों को सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है और यातायात तथा सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
बुलडोजर कार्रवाई का रास्ता खुला
हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने से इनकार किए जाने के बाद संबंधित प्रशासन के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, कार्रवाई के दौरान संबंधित नियमों और न्यायिक निर्देशों का पालन करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
अतिक्रमण हटाने को लेकर कानूनी प्रक्रिया
सार्वजनिक भूमि या फुटपाथ पर अतिक्रमण हटाने के मामलों में प्रशासन को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है। प्रभावित लोगों की ओर से अदालत में कार्रवाई को चुनौती दी जा सकती है, लेकिन केवल लंबे समय से किसी स्थान पर मौजूद रहने के आधार पर सार्वजनिक फुटपाथ पर कब्जे को वैध नहीं माना जा सकता।
आम लोगों की सुविधा भी बड़ा मुद्दा
फुटपाथ पर अतिक्रमण का सीधा असर पैदल यात्रियों पर पड़ता है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग लोगों के लिए सुरक्षित पैदल मार्ग उपलब्ध रहना जरूरी है। इसी वजह से अदालतों ने कई मामलों में सार्वजनिक रास्तों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
कार्रवाई के बाद उठ सकते हैं कई सवाल
लोहार बस्ती में संभावित बुलडोजर कार्रवाई के बाद पुनर्वास, आजीविका और प्रभावित परिवारों से जुड़े सवाल भी सामने आ सकते हैं। प्रशासन के सामने चुनौती यह होगी कि अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ लागू नियमों के तहत प्रभावित लोगों से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं का भी पालन किया जाए।
हाईकोर्ट के रुख का व्यापक संदेश
इस मामले में हाईकोर्ट का रुख दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। अदालत का संदेश स्पष्ट है कि सार्वजनिक फुटपाथ और रास्ते आम जनता के लिए हैं और उन पर स्थायी या अस्थायी कब्जे को सामान्य स्थिति के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।