नई दिल्ली, 04 सितंबर2026 । दिल्ली में मतदाता सूची को लेकर महज तीन दिनों में बड़ी संख्या में क्लेम और ऑब्जेक्शन सामने आने से चुनावी तैयारियों के बीच हलचल बढ़ गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस अवधि में करीब 5.40 लाख क्लेम और आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे आवेदनों की है, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग की गई है।
वहीं वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के तहत 51,556 आवेदन आए हैं। वोटर लिस्ट में संशोधन के लिए फॉर्म -S के 2,65,396 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा विदेश में रहने वाले इंडियन वोटर्स के लिए फॉर्म-6ए के 1,372 आवेदन मिले हैं।
50 हजार से अधिक नाम हटाने के आवेदन
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 50 हजार से ज्यादा आवेदन मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए प्राप्त हुए हैं। ऐसे आवेदनों में आमतौर पर मृत मतदाता, दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से चले गए मतदाता, डुप्लीकेट एंट्री या अन्य कारणों का हवाला दिया जाता है। हालांकि, किसी भी नाम को सूची से हटाने से पहले संबंधित चुनावी अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच की जाती है।
इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियों से क्या संकेत?
तीन दिनों में 5.40 लाख क्लेम और ऑब्जेक्शन सामने आना सामान्य चुनावी प्रक्रिया के मुकाबले काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में दावे और आपत्तियां आने से मतदाता सूची की शुद्धता और उसमें मौजूद प्रविष्टियों की जांच का काम भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
नाम हटाने से पहले होगी जांच
मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम केवल आवेदन मिलने के आधार पर नहीं हटाया जाता। संबंधित अधिकारी आवेदन में दिए गए कारणों और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति को नोटिस या सुनवाई का अवसर भी दिया जा सकता है। इसके बाद नियमों के अनुसार नाम हटाने या बरकरार रखने का फैसला किया जाता है।
राजनीतिक रूप से भी अहम है मामला
दिल्ली की मतदाता सूची में इतने बड़े स्तर पर क्लेम और ऑब्जेक्शन सामने आने का राजनीतिक महत्व भी है। चुनाव के दौरान मतदाता सूची में नाम को लेकर राजनीतिक दल अक्सर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया पर सभी दलों की नजर रहती है।
मतदाताओं के लिए जरूरी है रिकॉर्ड की जांच
मतदाताओं के लिए भी यह समय अपने नाम और अन्य विवरणों की जांच करने का है। यदि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है या उसके विवरण में गलती है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या सुधार के लिए आवेदन कर सकता है। वहीं, यदि किसी व्यक्ति के नाम को हटाने के लिए आपत्ति दर्ज की गई है, तो संबंधित चुनावी प्राधिकरण की प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी होगा।
पारदर्शी प्रक्रिया पर जोर
इतनी बड़ी संख्या में प्राप्त दावों और आपत्तियों के बीच सबसे अहम चुनौती यह होगी कि मतदाता सूची में वास्तविक मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहें और गलत या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को नियमों के अनुसार हटाया जाए। चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरा करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।