चंडीगढ़, 28 अगस्त 2026 । पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कर्मचारी संगठनों की हड़ताल को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक के दौरान उन्होंने साफ कहा कि सरकार बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालना चाहती है, लेकिन बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकती। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद पंजाब में कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच गतिरोध को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मान बोले- जायज मांग सुनने के लिए हम तैयार
सीएम मान ने कहा कि कर्मचारी हमारे परिवार का अहम हिस्सा हैं और उनकी हर जायज मांग सुनने के लिए हम तैयार हैं। लेकिन बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकतीं। सरकार हर समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन बातचीत तभी होगी, जब हड़ताल खत्म की जाएगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को देश के सभी सरकारी कर्मचारियों की तुलना में सबसे अधिक वेतन मिलता है। अगर केंद्र किसी कर्मचारी को 30000-32000 रुपये देता है तो पंजाब सरकार उसे 50,000 रुपये देती है। यह बेहद गर्व और संतोष की बात है कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को सबसे अधिक वेतन देती है, जो प्रशासन की रीढ़ हैं।
कर्मचारी संगठनों के साथ हुई बैठक
भगवंत मान ने कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी मांगों और समस्याओं को सुना। बैठक में कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से समस्याओं के समाधान के लिए संवाद का रास्ता अपनाने पर जोर दिया गया।
हड़ताल को लेकर मुख्यमंत्री का दो टूक संदेश
मुख्यमंत्री ने कर्मचारी संगठनों से कहा कि यदि सरकार के साथ बातचीत चल रही है तो उसी दौरान हड़ताल करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।
भगवंत मान के इस रुख को कर्मचारी संगठनों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि सरकार उनकी मांगों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन आंदोलन और बातचीत को एक साथ चलाने के पक्ष में नहीं है।
कर्मचारियों की मांगों पर भी चर्चा
बैठक में कर्मचारी संगठनों ने अपनी विभिन्न मांगें सरकार के सामने रखीं। इनमें वेतन, सेवा शर्तों और कर्मचारियों से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों की बात सुनी और संबंधित मुद्दों पर सरकार के स्तर से विचार करने का भरोसा दिया।
सरकार और कर्मचारियों के बीच बढ़ा दबाव
पंजाब में कर्मचारी संगठनों के आंदोलन का असर सरकारी कामकाज पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के सामने कर्मचारियों की मांगों का समाधान निकालने के साथ-साथ प्रशासनिक कामकाज को सुचारु बनाए रखने की चुनौती है।
भगवंत मान के बयान से साफ है कि सरकार कर्मचारी संगठनों के साथ संवाद का रास्ता खुला रखना चाहती है। अब देखना होगा कि कर्मचारी संगठन हड़ताल के अपने रुख में बदलाव करते हैं या अपनी मांगों को लेकर आंदोलन आगे बढ़ाते हैं।