पटना, 28 अगस्त 2026 । बिहार की राजधानी पटना की राजनीति में आगामी चुनाव को लेकर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। नीरज कुमार के सामने पटना से लगातार चौथी जीत दर्ज करने की चुनौती है। वहीं शिक्षा विभाग के चर्चित पूर्व अधिकारी केके पाठक से टकराव को लेकर सुर्खियों में रहे बंशीधर भी राजनीतिक मैदान में महत्वपूर्ण नाम बनकर उभर रहे हैं।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
पटना स्नातक सीट का फिलहाल प्रतिनिधित्व नीरज कुमार (जदयू) कर रहे हैं। बिहार विधान परिषद के 2020 के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार 8,252 वोटों के अंतर से जीते थे। जनता दल (यू) के नीरज कुमार को 20,948 वोट मिले थे। उन्होंने राजद प्रत्याशी आजाद गांधी को हराया था। जिन्हें 12,696 मत प्राप्त हुए थे। पटना स्नातक क्षेत्र से राजद के आजाद गांधी को हराकर जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार ने जीत की हैट्रिक लगाई थी।
नीरज कुमार के सामने जीत का चौका
नीरज कुमार पटना की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। अब उनके सामने अपनी लगातार जीत का सिलसिला बरकरार रखने की चुनौती है। अगर वह एक और चुनाव जीतने में सफल रहते हैं तो इसे उनकी राजनीतिक पारी की बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। हालांकि चुनावी समीकरण हर बार बदलते हैं और किसी भी उम्मीदवार के लिए जीत आसान नहीं होती।
बंशीधर की भी बढ़ी चर्चा
इस मुकाबले में बंशीधर का नाम भी खास चर्चा में है। वह उस समय सुर्खियों में आए थे जब उनका टकराव बिहार के चर्चित आईएएस अधिकारी केके पाठक से हुआ था। प्रशासनिक फैसलों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर दोनों के बीच विवाद ने काफी राजनीतिक और सार्वजनिक ध्यान खींचा था।
अब बंशीधर की राजनीतिक सक्रियता को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। उनकी छवि और पिछली भूमिका को देखते हुए चुनाव में उनका प्रदर्शन भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
पटना में बदलते राजनीतिक समीकरण
पटना बिहार की राजनीति का प्रमुख केंद्र है। यहां चुनावी मुकाबले में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ के साथ-साथ पार्टी का संगठन, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं का सामाजिक समीकरण भी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में नीरज कुमार के सामने जीत का सिलसिला बनाए रखने के लिए इन सभी पहलुओं पर मजबूत पकड़ दिखाने की चुनौती होगी।
केके पाठक विवाद से मिली पहचान
बंशीधर का नाम केके पाठक से जुड़े विवाद के कारण पहले ही व्यापक स्तर पर चर्चा में आ चुका है। अब राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। देखना होगा कि प्रशासनिक पृष्ठभूमि और विवादों से बनी पहचान को वह चुनावी राजनीति में किस तरह इस्तेमाल कर पाते हैं।
पटना की सियासत में नीरज कुमार और बंशीधर जैसे चेहरों की मौजूदगी मुकाबले को दिलचस्प बना रही है। नीरज कुमार जहां जीत का चौका लगाने की कोशिश करेंगे, वहीं बंशीधर अपनी राजनीतिक पहचान को मजबूत करने के लिए मैदान में उतर सकते हैं। चुनावी नतीजे ही तय करेंगे कि पटना में किसका सियासी पलड़ा भारी रहता है।