टॉक्सिक’ एक्ट्रेस रुक्मिणी वसंत के पिता थे अशोक चक्र विजेता

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नई दिल्ली, 28 अगस्त 2026 । कन्नड़ और साउथ सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री रुक्मिणी वसंत इन दिनों फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर सुर्खियों में हैं। लेकिन उनकी निजी जिंदगी की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है। रुक्मिणी के पिता कर्नल वसंत वेणुगोपाल भारतीय सेना के वीर अधिकारी थे, जिन्होंने 2007 में जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में आतंकियों से लड़ते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।

बताया जाता है कि ऑपरेशन में करीब 8 आतंकवादी शामिल थे। कर्नल वसंत ने आतंकियों का बहादुरी से मुकाबला किया और बाद में उन्हें देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी और बेटियों ने भी सैनिक परिवारों की मदद का काम आगे बढ़ाया।

कर्नाटक के पहले अशोक चक्र विजेता

कर्नल वसंत वेणुगोपाल को उनकी वीरता के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र दिया गया। वह कर्नाटक से इस सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार के पहले प्राप्तकर्ता बताए जाते हैं। रुक्मिणी ने कई इंटरव्यू में अपने पिता की बहादुरी और देशसेवा को याद किया है।

मां ने अकेले संभाली दोनों बेटियों की जिम्मेदारी

पिता के निधन के बाद रुक्मिणी की मां सुभाषिनी वसंत ने दोनों बेटियों की परवरिश की। वह भरतनाट्यम डांसर हैं और बाद में उन्होंने शहीद सैनिकों के परिवारों और उनकी विधवाओं की मदद के लिए फाउंडेशन भी शुरू किया।

पिता की सीख को अभिनय में आगे बढ़ाया

रुक्मिणी ने बताया है कि उनके पिता काम के प्रति बेहद समर्पित सैनिक थे और अपने जवानों को जहां भेजते थे, खुद आगे रहकर उनका नेतृत्व करते थे। अभिनेत्री का कहना है कि वह सेना में जाकर देशसेवा नहीं कर सकीं, लेकिन लोगों को अपनी कला के जरिए भावनाएं महसूस कराना उनके लिए सेवा का एक तरीका है।

‘टॉक्सिक’ से मिली देशभर में पहचान

रुक्मिणी वसंत ने ‘सप्ता सागरदाचे एलो’, ‘कांतारा: चैप्टर 1’ जैसी फिल्मों से पहचान बनाई और अब यश स्टारर ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ में नजर आ रही हैं। फिल्म में उनकी भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।

रुक्मिणी की फिल्मी सफलता के पीछे उनके पिता कर्नल वसंत वेणुगोपाल की देशसेवा की विरासत भी जुड़ी हुई है। एक तरफ वह सिनेमा में अपनी पहचान बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार की कहानी शौर्य, बलिदान और सेवा की मिसाल पेश करती है।

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