पंजाब , 14 अगस्त 2026 । पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है और अब पार्टी हाईकमान की नजर सीधे प्रदेश संगठन पर है। राहुल गांधी के जल्द पंजाब आने की चर्चा ने सियासी हलचल और तेज कर दी है। कांग्रेस के भीतर चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थकों के बीच खींचतान खुलकर सामने आने के बाद पार्टी नेतृत्व हालात को संभालने की कोशिश में जुटा है।
दिल्ली में कांग्रेस नेताओं की बैठकों का दौर
पंजाब कांग्रेस में जारी गुटबाजी और संगठन से जुड़े मुद्दों को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर रहे हैं। इन बैठकों में पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, पार्टी संगठन और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर मंथन किया जा रहा है। इसी कड़ी में पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने हाल ही में दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, बाजवा ने पंजाब कांग्रेस के विधायकों की राहुल गांधी के साथ बैठक के लिए भी समय मांगा है।
2027 चुनाव से पहले एकजुटता जरूरी
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकजुटता बेहद महत्वपूर्ण है। पार्टी के सामने आम आदमी पार्टी, बीजेपी और अन्य राजनीतिक ताकतों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है।
अगर कांग्रेस समय रहते अंदरूनी विवाद को नियंत्रित कर लेती है तो चुनावी तैयारी को गति मिल सकती है। लेकिन गुटबाजी जारी रही तो इसका असर कार्यकर्ताओं के मनोबल और जनता के बीच पार्टी की छवि पर पड़ सकता है।
राहुल गांधी के दौरे से क्या बदलेगा?
राहुल गांधी के संभावित हस्तक्षेप से पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रही बहस को नई दिशा मिल सकती है। फिलहाल पार्टी के भीतर सभी की नजर इस बात पर है कि हाईकमान राजा वड़िंग के नेतृत्व को जारी रखता है, चन्नी खेमे को कोई बड़ी जिम्मेदारी देता है या दोनों गुटों के बीच कोई नया राजनीतिक संतुलन तैयार करता है।