चंडीगढ़, 04 अगस्त 2026 । कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की संभावित मेजबानी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन करते हुए सवाल उठाया कि देश के लिए सबसे अधिक पदक जीतने वाले खिलाड़ियों में हरियाणा की बड़ी हिस्सेदारी रहती है, फिर भी कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के आयोजन के लिए गुजरात को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है। उन्होंने कहा कि खेलों में हरियाणा का योगदान किसी से छिपा नहीं है और ऐसे में राज्य को भी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी का अवसर मिलना चाहिए।
13 में 7 गोल्ड हरियाणा से आए
हुड्डा ने कहा कि देश का नाम रोशन करने पर कॉमनवेल्थ खेलों के सभी विजेता खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई। हमें प्रत्येक पदक विजेता पर गर्व है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के 13 गोल्ड मेडल में से 7 गोल्ड मेडल अकेले हरियाणा से आए हैं। इसलिए हमारी मांग है कि 2030 कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी हरियाणा में की जाए या सह-मेजबान प्रदेश बनाया जाए। 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत को मिले 39 गोल्ड मेडल में से 24 गोल्ड अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने दिलाए थे। अगर भारत माता की झोली कोई भर रहा है, तो वे हरियाणा के खिलाड़ी हैं।
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा ने वर्षों से ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में देश को बड़ी संख्या में पदक विजेता खिलाड़ी दिए हैं। उनके अनुसार, राज्य में खेल संस्कृति मजबूत है, खेल अधोसंरचना का लगातार विस्तार हुआ है और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसे में यदि भारत कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी करता है, तो हरियाणा को भी इस प्रक्रिया में उचित महत्व मिलना चाहिए।
संसद परिसर के बाहर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे को क्षेत्रीय संतुलन और खेल विकास से जोड़ते हुए केंद्र सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। उनका कहना था कि खेल आयोजनों के चयन में उन राज्यों की उपलब्धियों और योगदान को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, जिन्होंने लंबे समय से देश के लिए उत्कृष्ट खिलाड़ी तैयार किए हैं।
वहीं, इस विषय पर सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी का निर्णय खेल अधोसंरचना, परिवहन, आवास, सुरक्षा, वित्तीय क्षमता और अंतरराष्ट्रीय मानकों सहित कई पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जाता है। ऐसे में अंतिम निर्णय संबंधित प्रक्रिया और मूल्यांकन के आधार पर ही तय होता है।