नई दिल्ली, 03 अगस्त 2026 । पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। संबंधित कोर्ट के जज का तबादला (ट्रांसफर) कर दिया गया है, जिसके बाद चर्चाएं तेज हो गई हैं कि इससे हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई की गति और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा।
दिल्ली हाई कोर्ट के इस प्रशासनिक फैसले के बाद अब इन हाई प्रोफाइल मामलों की सुनवाई नए जज करेंगे।
- NEET पेपर लीक और एंट्रेंस एग्जाम में कथित गड़बड़ियों के विरोध में युवाओं और छात्रों के व्यापक विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस तरह के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की थी।
- इसी के तहत दिल्ली हाई कोर्ट ने 24 जुलाई को राउज एवेन्यू कोर्ट में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई।
- इस अदालत में NEET समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा में धांधली से जुड़े मामलों की सुनवाई होनी थी।
- कोर्ट की जिम्मेदारी स्पेशल जज (पीसी एक्ट) अनु ग्रोवर बालीगा को सौंपी गई थी।
पेपर लीक मामलों की सुनवाई अब नए जज करेंगे
- अब 1 अगस्त को जारी और 4 अगस्त से प्रभावी आदेश के तहत जज बालीगा को स्पेशल एक्सक्लूसिव कोर्ट-04 में भेज दिया गया है, जहां वह एनआईए अधिनियम, 2008 और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपाए) से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी।
- उनकी जगह स्पेशल जज (पीसी एक्ट) रहे अजय गुप्ता को इस विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रभार दिया गया है।
- हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि राउज एवेन्यू कोर्ट की अन्य अदालतों में लंबित एंट्रेंस एग्जाम धोखाधड़ी और पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों को ट्रांसफर कर गुप्ता की अदालत में भेजा जाए।
- यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब NEET पेपर लीक समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमिताओं के मामलों पर देशभर की नजर बनी हुई है।
- हाई कोर्ट ने प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा, संगठित अपराध, NDPS और जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों के लिए भी कई स्पेशल एक्सक्लूसिव कोर्ट गठित की हैं।
न्यायिक अधिकारियों के तबादले नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन जब मामला संवेदनशील और चर्चित मामलों से जुड़ा हो तो ऐसे फैसलों पर स्वाभाविक रूप से लोगों की नजर रहती है। अब संबंधित मामलों की सुनवाई नए न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।
पेपर लीक से जुड़े मामलों में विभिन्न जांच एजेंसियां पहले से ही आरोपियों की भूमिका, साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन सहित कई पहलुओं की जांच कर रही हैं। इन मामलों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट की भूमिका समयबद्ध सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक तबादले का अर्थ किसी मामले के परिणाम या दिशा से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक नियमित प्रशासनिक निर्णय हो सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि नए न्यायिक अधिकारी के कार्यभार संभालने के बाद पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई किस गति से आगे बढ़ती है।