आपदा प्रबंधन कर्मियों को बड़ी राहत, 16 साल बाद वेतन दोगुना

जेल में अप्राकृतिक मौत पर ₹7.5 लाख मुआवजे का प्रावधान

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नई दिल्ली, 03 अगस्त 2026 । दिल्ली सरकार ने आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। करीब 16 वर्षों बाद आपदा प्रबंधन से जुड़े कर्मियों का वेतन दोगुना करने का फैसला लिया गया है। लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनकी कार्यक्षमता को भी मजबूती मिलेगी।

  • मुख्यमंत्री ने बताया कि साल 2009 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से इन पदों की शुरुआत हुई थी।
  • तब से प्रोजेक्ट ऑफिसर और डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट ऑफिसर का मासिक मानदेय 25 हजार रुपये, जबकि प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर का 20 हजार रुपये था।
  • इस दौरान महंगाई बढ़ी, जिम्मेदारियां बढ़ीं लेकिन मानदेय में कोई बदलाव नहीं किया गया।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में समान जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारियों को करीब 45 से 50 हजार रुपये या उससे अधिक मानदेय मिलता है।
  • सरकार के कई विभागों में भी समान स्तर के संविदा पदों की सैलरी इससे अधिक है।
  • ऐसे में DSDMA कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाना जरूरी था।
  • सरकार का मकसद केवल मानदेय बढ़ाना नहीं बल्कि दिल्ली की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाना है।
  • 2009 के बाद पहली बार बदलाव, नए सैलरी सिस्टम को सरकार की मंजूरी
  • 100% तक की बढ़ोतरी दिल्ली सरकार ने सैलरी में की है
  • इसका मकसद आपदा प्रबंधन को मजबूत करना: CM
  • समान लेवल के संविदा पदों की सैलरी इनसे थी अधिक

इसके साथ ही सरकार ने जेल में अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में मृतक के परिजनों को 7.5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी प्रावधान किया है। इस निर्णय का उद्देश्य ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना और जवाबदेही की व्यवस्था को मजबूत करना है। मुआवजा निर्धारित नियमों और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही दिया जाएगा।

सरकार के अनुसार, आपदा प्रबंधन कर्मी बाढ़, भूकंप, आग, भूस्खलन और अन्य आपात परिस्थितियों में जोखिम उठाकर लोगों की जान बचाने का काम करते हैं। ऐसे में उनके वेतन और सेवा शर्तों में सुधार आवश्यक था। वहीं जेलों में सुरक्षा और मानवाधिकार मानकों को मजबूत करने के लिए भी नई व्यवस्था लागू की गई है।

इन दोनों फैसलों को प्रशासनिक सुधार और कर्मचारी कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि भविष्य में भी जनहित, कर्मचारी कल्याण और संस्थागत जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाते रहेंगे।

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