चंडीगढ़ , 31 जुलाई 2026 । पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर पार्टी इस बार कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब में संगठनात्मक स्थिति का आकलन करने की जिम्मेदारी दी है। माना जा रहा है कि पार्टी पहले वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की राजनीतिक पकड़, जनाधार और संगठन पर उनकी प्रभावशीलता का विस्तृत मूल्यांकन करेगी, उसके बाद ही किसी बड़े फैसले पर आगे बढ़ेगी।
चन्नी की ताकत जांचेंगे बघेल
सूत्रों के अनुसार आलाकमान ने चरणजीत सिंह चन्नी की ताकत को टटोलने के लिए भूपेश बघेल को ग्रीन सिग्नल दे दिया है। बघेल पंजाब में 10 दिनों तक प्रवास करेंगे। वह इस दौरान 18 जिलों का दौरा करके नब्ज टटोलेंगे। कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ ग्राउंड जीरों के रिस्पांस को चेक करेंगे। इसके बाद ही चरणजीत सिंह चन्नी का चाहत पर कोई फैसला होगा। आलाकमान के इस कदम को पंजाब कांग्रेस में चल रही गुटबाजी को लेकर आर-पार वाले एक्शन से जोड़कर भी देखा जा रहा है। एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि हाईकमान गुटबाजी पर स्ट्रिक्ट एक्शन लेने से पहले ग्राउंड रिएलिटी चेक करना चाहता है।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस पिछले अनुभवों से सबक लेते हुए पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन या संगठनात्मक फेरबदल को लेकर सावधानी बरत रही है। पार्टी नहीं चाहती कि बिना व्यापक रायशुमारी और जमीनी फीडबैक के कोई ऐसा फैसला लिया जाए, जिससे संगठन के भीतर असंतोष पैदा हो। इसी रणनीति के तहत भूपेश बघेल विभिन्न नेताओं, कार्यकर्ताओं और जिला स्तर के पदाधिकारियों से संवाद कर मौजूदा राजनीतिक स्थिति का आकलन कर सकते हैं।
कांग्रेस की नजर आगामी चुनावी चुनौतियों पर भी है। पार्टी पंजाब में संगठन को मजबूत करने, गुटबाजी कम करने और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में चरणजीत सिंह चन्नी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं की भूमिका, जनस्वीकार्यता और संगठन में प्रभाव का मूल्यांकन भविष्य की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि कांग्रेस पंजाब में नेतृत्व से जुड़े किसी भी बड़े निर्णय से पहले व्यापक समीक्षा और राजनीतिक आकलन की प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रही है।