नई दिल्ली, 18 जुलाई 2026 । भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपना पहला निजी (Private) ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। हैदराबाद स्थित स्पेसटेक कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) द्वारा विकसित इस रॉकेट ने निर्धारित मिशन के तहत सफलतापूर्वक लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में कई पेलोड स्थापित किए। यह उपलब्धि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।
इसे आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा में इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर 12:05 बजे लॉन्च किया गया। पहले यह लॉन्चिंग 11:30 बजे होनी थी, लेकिन 5 मिनट पहले काउंटडाउन रोक दिया गया। कुछ देर बाद इसे दोबारा शुरू किया गया। पीएम मोदी ने स्काईरूट के फाउंडर पवन कुमार चंदना को फोन करके बधाई दी है।
कंपनी ने 2022 में विक्रम-एस सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो 89.5 km की ऊंचाई तक गया था। अब विक्रम-1 450 km की पृथ्वी की सर्कुलर निचली कक्षा तक पहुंच गया है। इसे भारत के स्पेस सेक्टर के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
‘मिशन आगमन‘ नाम से संचालित इस उड़ान का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। करीब 22 मीटर लंबे विक्रम-1 रॉकेट में ठोस और तरल ईंधन आधारित चरणों के साथ उन्नत 3डी-प्रिंटेड इंजन तकनीक का उपयोग किया गया। लॉन्च के लगभग 15 मिनट बाद रॉकेट ने अपने पेलोड को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर मिशन पूरा किया।
इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनी ने स्वयं विकसित ऑर्बिटल रॉकेट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि भारत के तेजी से बढ़ते निजी स्पेस इकोसिस्टम, नवाचार और वैश्विक स्पेस मार्केट में बढ़ती भागीदारी का संकेत है। सरकार द्वारा 2020 में स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोलने के बाद इस क्षेत्र में कई स्टार्टअप तेजी से उभरे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं और वैज्ञानिकों ने इस उपलब्धि को भारत की वैज्ञानिक क्षमता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की बड़ी सफलता बताया। माना जा रहा है कि विक्रम-1 की सफलता से भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण बाजार में नई संभावनाएं खुलेंगी और निजी कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा।