नई दिल्ली, 07 जुलाई 2026 । दिल्ली में स्कूली बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राजधानी के सभी 5,633 सरकारी और निजी स्कूलों में बाल संरक्षण समिति (Child Protection Committee) का गठन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना है।
- शिक्षा विभाग ने बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग और पॉक्सो अधिनियम के निर्देशों के अनुसार दिल्ली के सभी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत सुरक्षा जांच सूची (चेक लिस्ट) लागू की जा रही है।
- इनमें 1,077 दिल्ली सरकार के स्कूल, 198 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, 2612 एमसीडी, एनडीएमसी और दिल्ली छावनी बोर्ड और 1,746 प्राइवेट स्कूल शामिल हैं। विभाग शिक्षकों, स्कूल कर्मचारियों और मुख्य प्रशिक्षकों को पॉक्सो अधिनियम के तहत प्रशिक्षण दे रहा है।
सरकार के निर्देश के अनुसार, प्रत्येक स्कूल में गठित होने वाली बाल संरक्षण समिति बच्चों से जुड़े किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न, हिंसा, बुलिंग, लैंगिक अपराध, मानसिक प्रताड़ना और सुरक्षा संबंधी शिकायतों की निगरानी करेगी। समिति बच्चों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगी।
इस समिति में स्कूल प्रबंधन, शिक्षक, अभिभावकों के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित सदस्य शामिल होंगे। समिति समय-समय पर स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े सभी दिशा-निर्देशों का पालन हो।
सरकार का मानना है कि स्कूलों में बाल संरक्षण समितियों के गठन से बच्चों के खिलाफ होने वाली घटनाओं की रोकथाम में मदद मिलेगी और शिकायतों के समाधान के लिए संस्थागत व्यवस्था मजबूत होगी। इसके साथ ही छात्रों और अभिभावकों का स्कूल व्यवस्था पर भरोसा भी बढ़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्कूल, अभिभावकों और समाज की साझा जिम्मेदारी है। ऐसे में यह पहल सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।