CMO की अनुमति के अभाव में QR कोड वाले जन्म प्रमाण पत्र अटके, हर जोन में 200 से अधिक आवेदन लंबित

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गाजियाबाद , 07  जुलाई 2026 । शहर में QR कोड युक्त जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया गंभीर प्रशासनिक बाधा का सामना कर रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की अंतिम स्वीकृति नहीं मिलने के कारण प्रत्येक जोन में 200 से अधिक आवेदन लंबित पड़े हैं। इससे नवजात शिशुओं के अभिभावकों को स्कूल प्रवेश, पासपोर्ट, आधार कार्ड, सरकारी योजनाओं और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।

ऐसे में लोगों को बच्चों के दाखिले, पासपोर्ट या अन्य जरूरी कामों के लिए देरी हो रही है। नगर निगम के जोनल कार्यालयों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं। अधिकारियों के अनुसार, मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से अप्रूवल नहीं मिलने के कारण क्यूआर कोड वाले जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं।

सीएमओ कार्यालय से मिलनी मंजूरी

नगर निगम क्षेत्र में अब केवल क्यूआर कोड वाले डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। जिन लोगों के पास पहले से पारंपरिक जन्म प्रमाण पत्र हैं, वे भी उन्हें नए डिजिटल प्रारूप में बदलवाने के लिए नगर निगम के जोनल कार्यालयों में आवेदन कर रहे हैं। लेकिन आवेदन ऑनलाइन दर्ज होने के बाद अंतिम मंजूरी सीएमओ कार्यालय से मिलनी होती है। फिलहाल यही चरण सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, कविनगर और सिटी जोन समेत सभी जोन के आवेदन लंबे समय से लंबित है। सिटी जोन के जोनल प्रभारी आरपी सिंह ने बताया कि उनके यहां 200 से अधिक आवेदन लंबित पड़े हैं। ये सभी ऐसे मामले हैं जिनमें पुराने जन्म प्रमाण पत्र को क्यूआर कोड वाले प्रमाण पत्र में बदला जाना है। उन्होंने बताया कि पिछले काफी दिनों से शासन की वेबसाइट भी सुचारु रूप से काम नहीं कर रही है। इसके कारण सीएमओ कार्यालय में ही करीब 350 जन्म प्रमाण पत्रों के आवेदन लंबित हो गए हैं। उनका कहना है कि जैसे ही वेबसाइट की तकनीकी समस्ऱ्या दूर होगी और अप्रूवल की प्रक्रिया सामान्य होगी, लंबित आवेदनों का तेजी से निस्तारण किया जाएगा।

नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर आवेदन की प्रारंभिक जांच और दस्तावेजों का सत्यापन पूरा होने के बावजूद अंतिम अनुमोदन CMO कार्यालय से नहीं मिल पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि स्वीकृति प्रक्रिया में देरी के कारण QR कोड वाले डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं हो रहे हैं। कई आवेदक सप्ताहों से कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुमति प्रक्रिया को समयबद्ध और ऑनलाइन बनाया जाए तो लंबित आवेदनों का शीघ्र निपटारा संभव है। नागरिकों ने भी प्रशासन से मांग की है कि लंबित प्रमाण पत्र जल्द जारी किए जाएं ताकि आवश्यक सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की बाधा न आए।

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