नई दिल्ली, 27 जून् 2026 । अडाणी समूह से जुड़े मामले में अमेरिकी अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए केस को तुरंत खारिज करने की मांग स्वीकार नहीं की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में उठाए गए कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है, इसलिए सुनवाई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।
फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स यानी सरकारी वकीलों ने 18 मई को घोषणा की थी कि वे इस मामले में आगे मुकदमा नहीं चलाएंगे। मामले में अडाणी पर रिश्वतखोरी प्लान से जुड़े सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड के आरोप थे।
इसके बाद अडाणी के वकीलों ने बुधवार को ब्रुकलिन के अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस से मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने का अनुरोध किया था। हालांकि, जज ने कहा कि प्रॉसिक्यूटर्स का नोटिस इस फैसले का पूरा एक्सप्लेनेशन नहीं देता है।
गराउफिस ने कहा कि सरकार का संक्षिप्त, सपाट और निष्कर्ष निकालने वाला बयान अदालत को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसके साथ ही यह केस की बर्खास्तगी के सरकारी अनुरोध का एनालिसिस यानी जांच करने के लिए भी सही नहीं है।
मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनकी जांच अमेरिकी एजेंसियां कर रही हैं। अदालत के इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि किसी पक्ष को दोषी ठहराया गया है, बल्कि केवल यह है कि मुकदमे को शुरुआती चरण में समाप्त करने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया। अब दोनों पक्ष अदालत के समक्ष अपने-अपने तर्क, दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने से इनकार करना अमेरिकी न्यायिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। अदालत पहले सभी तथ्यों और कानूनी दलीलों का परीक्षण करती है, जिसके बाद ही आगे की सुनवाई और संभावित निर्णय की दिशा तय होती है।
अडाणी समूह की ओर से पहले भी आरोपों से इनकार किया जाता रहा है और कंपनी ने कहा है कि वह सभी कानूनी प्रक्रियाओं में सहयोग करेगी। वहीं, अब इस मामले की अगली सुनवाई और अदालत की आगे की कार्यवाही पर निवेशकों और वैश्विक बाजार की नजर बनी रहेगी।