नई दिल्ली, 27 जून् 2026 । दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़े अहम मामले की सुनवाई अब एक नई न्यायिक पीठ के समक्ष होगी। इससे पहले इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्वयं को इस केस की सुनवाई से अलग (Recuse) कर लिया था। इसके बाद अब मामले को दूसरे न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
1 जुलाई से बदल जाएगा हाई कोर्ट का रोस्टर
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा हाल के महीनों में दिल्ली की आबकारी नीति मामले और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर चर्चा में रही है। हालांकि, हाई कोर्ट में रोस्टर का पुनर्गठन नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इसका समय हालिया घटनाक्रम के कारण विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है। विवाद तब शुरू हुआ था जब अरविंद केजरीवाल और अन्य पक्षकारों ने आबकारी नीति मामले में जस्टिस शर्मा की अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार किया। इसके बाद अदालत ने उनके और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की।
किसी न्यायाधीश द्वारा किसी मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करना न्यायिक प्रक्रिया का एक स्थापित हिस्सा है। ऐसा विभिन्न कारणों से किया जा सकता है, ताकि न्यायिक निष्पक्षता और पारदर्शिता पर किसी प्रकार का सवाल न उठे। हालांकि, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्वयं को अलग करने के पीछे कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया।
अब अदालत की प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत इस मामले को नई पीठ को सौंपा जाएगा, जिसके बाद अगली सुनवाई की तारीख तय होगी। नई पीठ मामले में दाखिल याचिकाओं, दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की सुनवाई करेगी।
अरविंद केजरीवाल से जुड़े मामलों पर देशभर की नजर बनी हुई है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई पीठ के समक्ष सुनवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है और अदालत इस मामले में आगे क्या निर्णय लेती है।