सुशांत सिंह राजपूत केस की यादों से अब भी उबर नहीं पाईं रिया चक्रवर्ती, बोलीं- ट्रॉमा से रिकवरी आसान नहीं

0

नई दिल्ली, 26 जून्‌ 2026 । रिया चक्रवर्ती ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े मामले को लेकर अपने मानसिक और भावनात्मक संघर्ष पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि उस दौर का ट्रॉमा आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और उससे बाहर निकलने की प्रक्रिया लंबी और चुनौतीपूर्ण रही है।

नेहा धूपिया और अंगद बेदी से बातचीत के दौरान रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत और ट्रॉमा पर बात की है। नेहा धूपिया ने रिया से पूछा कि एक इंटरव्यू में आपकी मां ने सवाल किया था कि मेरी बेटी इससे कैसे हील करेगी, क्या आपने इससे पूरी तरह रिकवर कर लिया है? तो जवाब में एक्ट्रेस ने कहा, ‘यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिससे आप कभी पूरी तरह उबर सकें। यह ट्रॉमा है। अगर दिमाग में न भी रहे, तो भी इसका असर शरीर में बना रहता है।’

आगे उन्होंने कहा, ‘इसमें PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) जैसी स्थिति हो सकती है। आप थेरेपी लेते हैं और धीरे-धीरे इससे निपटने की कोशिश करते हैं। क्योंकि हमारी चीज पब्लिक में है, तो लोग इसके बारे में बात करते हैं, सोचते हैं।’

सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस के समय रिया चक्रवर्ती द्वारा एक टी-शर्ट भी काफी सुर्खियों में रही थी, जिसमें पैट्रियारकी खत्म करने से जुड़ी एक लाइन लिखी गई थी।

रिया चक्रवर्ती ने बताया कि सुशांत सिंह राजपूत मामले के दौरान उन्हें कानूनी प्रक्रिया, मीडिया की लगातार सुर्खियों और सार्वजनिक चर्चा का सामना करना पड़ा, जिसका उनके निजी जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए ऐसे अनुभवों से उबरना आसान नहीं होता और इसमें समय लगता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किल दौर के बाद उन्होंने खुद को संभालने, मानसिक रूप से मजबूत बनने और सामान्य जीवन की ओर लौटने की कोशिश की है। रिया के अनुसार, परिवार और करीबी लोगों का सहयोग इस कठिन समय में उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया था। इसके बाद कई जांच एजेंसियों ने अलग-अलग पहलुओं से मामले की जांच की और रिया चक्रवर्ती भी लंबे समय तक सार्वजनिक बहस और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा रहीं।

रिया चक्रवर्ती का कहना है कि जीवन में आगे बढ़ने की कोशिश के बावजूद कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जिनकी यादें लंबे समय तक व्यक्ति के साथ रहती हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे लोगों को उचित भावनात्मक सहयोग और पेशेवर सहायता मिलनी चाहिए।

Leave A Reply

Your email address will not be published.