कांग्रेस का बड़ा दावा- PM मोदी का आंखें मूंदकर इजराइल का साथ देना भारतीय हितों के लिए हानिकारक

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नई दिल्ली, 20 जून्‌ 2026 । मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और इजराइल-ईरान संघर्ष के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi का इजराइल के प्रति अत्यधिक झुकाव और “आंखें मूंदकर समर्थन” भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

प्रधानमंत्री का इजराइल का आंख मूंदकर समर्थन करना देश के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है, भले ही इससे ‘मोदानी’ साम्राज्य के हित सुरक्षित हो रहे हों।” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शांति के लिए एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत सभी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने पर सहमति बनी है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भारत की विदेश नीति पारंपरिक रूप से संतुलित और बहुपक्षीय रही है, जिसमें पश्चिम एशिया के सभी प्रमुख देशों के साथ संबंध बनाए रखने पर जोर दिया जाता रहा है। पार्टी का तर्क है कि भारत के ऊर्जा, व्यापार और प्रवासी भारतीयों से जुड़े हित खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों से भी गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी एक पक्ष के प्रति अत्यधिक झुकाव उचित नहीं होगा।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष का असर वैश्विक तेल कीमतों, व्यापारिक मार्गों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत को शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान की वकालत करनी चाहिए, न कि किसी एक पक्ष के साथ पूरी तरह खड़ा दिखाई देना चाहिए।

वहीं केंद्र सरकार और भाजपा का पक्ष है कि भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। सरकार का कहना है कि भारत इजराइल, अरब देशों और ईरान समेत सभी देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ा रहा है। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख और क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहेंगे। इसी कारण विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो रही है।

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