नई दिल्ली, 05 जून् 2026 । RBI ने चालू वित्त वर्ष के दौरान महंगाई के दबाव बने रहने की आशंका जताई है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव, ऊर्जा लागत और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियां महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं। इसी वजह से आने वाले महीनों में कीमतों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता होगी।
रिजर्व बैंक ने नए वित्त वर्ष की दूसरी मीटिंग में रेपो रेट में बदलाव नहीं किया है। इसे 5.25% पर बरकरार रखा है। इससे लोन महंगे नहीं होंगे और EMI नहीं बढ़ेगी। वहीं 2027 में महंगाई के अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज 5 जून को इसकी जानकारी दी।
आरबीआई के अनुसार, मुद्रास्फीति को नियंत्रित दायरे में बनाए रखना आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि हाल के वर्षों में महंगाई के मोर्चे पर कुछ राहत देखने को मिली है, लेकिन कई ऐसे कारक हैं जो भविष्य में कीमतों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। विशेष रूप से खाद्य पदार्थों, ईंधन और आयातित वस्तुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और मौसम संबंधी परिस्थितियां महंगाई के प्रमुख निर्धारक बने हुए हैं। यदि कृषि उत्पादन प्रभावित होता है या वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका असर घरेलू बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है। इसी कारण केंद्रीय बैंक सतर्क रुख अपनाए हुए है।
महंगाई बढ़ने का प्रभाव आम लोगों की क्रय शक्ति पर पड़ता है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं, परिवहन, शिक्षा और अन्य सेवाओं की लागत बढ़ने से घरेलू बजट पर दबाव आ सकता है। इसलिए मौद्रिक नीति तैयार करते समय आरबीआई विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि महंगाई अनुमान से अधिक बढ़ती है, तो ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के संबंध में केंद्रीय बैंक को अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। वहीं यदि खाद्य और ऊर्जा कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो महंगाई को नियंत्रित रखना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
फिलहाल आरबीआई ने आर्थिक गतिविधियों और मुद्रास्फीति से जुड़े संकेतकों पर करीबी नजर रखने की बात कही है। आने वाले महीनों में मानसून, वैश्विक बाजारों की स्थिति और घरेलू मांग जैसे कारक यह तय करेंगे कि महंगाई किस दिशा में आगे बढ़ती है और उसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।