नई दिल्ली, 30 मई 2026 । दिल्ली में भवन सुरक्षा और फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब इमारतों के फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में निजी ऑडिटर्स की भूमिका बढ़ाई जाएगी। पहले यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के पास होती थी, लेकिन अब अधिकृत प्राइवेट फायर सेफ्टी ऑडिटर्स निरीक्षण के बाद फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे।
दिल्ली सरकार ने नियमों में किया बदलाव
दिल्ली सरकार ने फायर NOC लेने के लिए थर्ड पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिटर के लिए दिल्ली फायर सर्विस (संशोधन) नियम-2025 में बदलाव कर लागू कर दिया है। फायर इक्विपमेंट की 24 घंटे निगरानी के लिए इंटरनेट आधारित मॉनीटरिंग को भी शामिल किया गया है। जिससे समय पर खराब इक्विपमेंट की जानकारी मिलेगी।
सरकार का उद्देश्य फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाना है। लंबे समय से भवन मालिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की ओर से प्रमाणपत्र जारी होने में देरी की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद आवेदन से लेकर निरीक्षण और प्रमाणन तक की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
इस व्यवस्था के तहत अधिकृत निजी ऑडिटर्स भवनों में स्थापित फायर फाइटिंग सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग, अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर, अग्निशमन उपकरण और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच करेंगे। सभी आवश्यक मानकों के अनुरूप पाए जाने पर संबंधित इमारत को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। हालांकि नियामक निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी संबंधित सरकारी विभागों के पास बनी रहेगी।
नियमों में बदलाव को लेकर क्या बोले गृह मंत्री आशीष सूद
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार DFS (दिल्ली फायर सर्विसेज) से हटाकर अधिकृत फायर सेफ्टी ऑडिटर्स (FSAS) को सौंप दिया गया है। गृह मंत्री आशीष सूद के मुताबिक दिल्ली सरकार ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेशन की प्रक्रिय को डिसेंट्रलइज किया गया है, जिससे यह काम तेजी से हो सके। इमारतें में एक पेशेवर फायर ऑडिटिंग सिस्टम बने। जिससे आग जैसे घटनाओं से बच जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में तेजी से बढ़ती ऊंची इमारतों, मॉल, कार्यालय परिसरों और आवासीय परियोजनाओं को देखते हुए फायर सेफ्टी निरीक्षण प्रणाली का आधुनिकीकरण आवश्यक था। निजी क्षेत्र की भागीदारी से निरीक्षण क्षमता बढ़ेगी और लंबित मामलों के निपटारे में भी मदद मिलेगी।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने जवाबदेही और निष्पक्षता को लेकर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि निजी ऑडिटर्स के कार्यों की नियमित निगरानी और कड़े मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा ताकि सुरक्षा से कोई समझौता न हो। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था में ऑडिटर्स के लिए सख्त दिशानिर्देश और जवाबदेही तंत्र लागू किया जाएगा।
नई नीति को राजधानी में भवन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और फायर सेफ्टी अनुपालन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे व्यवसायों, संस्थानों और आवासीय परिसरों को प्रमाणन प्रक्रिया में सुविधा मिलने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों के बेहतर क्रियान्वयन की भी उम्मीद है।