पंजाब सरकार की बिजली बचत मुहिम पर उठे सवाल, खाली दफ्तरों में चलते मिले पंखे और लाइटें

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पंजाब , 25 मई 2026 । पंजाब सरकार की बिजली बचाने की नई पहल पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऊर्जा बचत को लेकर जारी निर्देशों के बावजूद कई सरकारी दफ्तरों और संस्थानों में खाली कमरों में पंखे और लाइटें चलते मिलने की खबर सामने आई है। इस मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और ऊर्जा संरक्षण अभियान की प्रभावशीलता पर बहस तेज कर दी है।

राज्य में बिजली बचाने के मकसद से मान सरकार ने आज से सरकारी दफ्तरों का समय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक करने का नया फरमान जारी किया था लेकिन लुधियाना के ज्यादातर सरकारी दफ्तरों में पहले दिन इस आदेश की जमकर धज्जियां उड़ीं। सुबह साढ़े सात बजे दफ्तर पूरी तरह खाली पड़े रहे और बाबू से लेकर बड़े अधिकारी तक समय पर सीट पर नहीं पहुंचे। हद तो तब हो गई जब कुर्सियां खाली होने के बावजूद दफ्तरों में लाइटें और पंखे धड़ल्ले से चल रहे थे, जिससे बिजली बचाने का सरकारी दावा पहले ही दिन हवा होता दिखा।

बताया जा रहा है कि सरकार ने हाल ही में बिजली की खपत कम करने और ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विभागों को निर्देश जारी किए थे। कर्मचारियों को गैरजरूरी बिजली उपकरण बंद रखने और कार्यालयों में ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का पालन ठीक से नहीं होने के आरोप लग रहे हैं।

स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि जब आम जनता को बिजली बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है, तब सरकारी दफ्तरों में ही लापरवाही देखने को मिलना चिंता की बात है। विपक्ष ने इसे सरकारी संसाधनों की बर्बादी बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आदेश जारी करने से बिजली बचत संभव नहीं है, बल्कि निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी है। सरकारी कार्यालयों में ऑटोमेटिक सिस्टम, ऊर्जा ऑडिट और नियमित निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू किए बिना बड़े स्तर पर बदलाव लाना मुश्किल हो सकता है।

मामले के सामने आने के बाद संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी जा सकती है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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