जालंधर/चंडीगढ़, 02 मई 2026 । शराब कारोबार से जुड़े लोगों के लिए अहम खबर सामने आई है। राज्य के Excise Department ने शराब के ठेकों की लाइसेंस फीस में कटौती का फैसला लिया है। इस निर्णय को शराब व्यापारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से लाइसेंस शुल्क को लेकर मांग उठ रही थी।
इनमें चंडीगढ़ के नए इलाके, भारतगढ़, सिटी सेंटर, टांडा, दसूहा, जालंधर के B.M.C. चौक और सोढल चौक, बलाचौर सिटी, कपूरथला-2, फगवाड़ा-2, बेगोवाल, पठानकोट बस स्टैंड, जुगियाल, परमानंद, बठिंडा-2 भारत नगर, फिरोजपुर कैंट और अबोहर सिटी-2 शामिल हैं। ठेकेदारों ने सरकार से मांग की है कि राज्य में अंग्रेजी शराब की बिक्री को कंट्रोल किया जाए और सिर्फ देसी शराब के दायरे में ही कारोबार को सीमित किया जाए।
पिछले वर्षों में कई राज्यों में शराब नीति को लेकर लगातार बदलाव किए गए हैं। कभी नीतियों में सख्ती, तो कभी फीस में बढ़ोतरी के चलते कई ठेकेदारों ने लाइसेंस लेने से दूरी बनाई थी। इसके चलते कई क्षेत्रों में ठेके खाली रह गए या फिर अवैध शराब के मामलों में वृद्धि देखने को मिली। ऐसे में एक्साइज विभाग ने हालात को ध्यान में रखते हुए यह रणनीतिक फैसला लिया है, ताकि अधिक से अधिक लोग लाइसेंस लेकर वैध रूप से कारोबार करें।
लाइसेंस फीस में कटौती से नए ठेकेदारों के लिए बाजार में प्रवेश आसान होगा। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिलने की संभावना है। साथ ही, सरकार को उम्मीद है कि लाइसेंस फीस कम होने से ज्यादा लोग आवेदन करेंगे, जिससे कुल लाइसेंस संख्या बढ़ेगी और अप्रत्यक्ष रूप से राजस्व में इजाफा होगा।
इसके अलावा, इस फैसले का एक उद्देश्य अवैध शराब कारोबार पर भी लगाम लगाना है। जब वैध लाइसेंस सस्ते और सुलभ होंगे, तो अवैध कारोबारियों के लिए बाजार में टिकना मुश्किल होगा। इससे न केवल सरकारी राजस्व सुरक्षित रहेगा बल्कि लोगों की सेहत से जुड़े जोखिम भी कम होंगे।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को केवल फीस कम करने के बजाय निगरानी और नियमों के सख्त पालन पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि इस क्षेत्र में पारदर्शिता बनी रहे। वहीं सामाजिक संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है कि इससे शराब की उपलब्धता बढ़ेगी, जो समाज पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।