नई दिल्ली, 02 मई 2026 । दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए Directorate of Education (DoE) ने निजी स्कूलों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब कोई भी स्कूल छात्रों से एक साथ 3 महीने की एडवांस फीस नहीं मांग सकेगा। इस फैसले का उद्देश्य अभिभावकों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना और फीस वसूली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
निदेशालय को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई स्कूल जबरन तिमाही (Quarterly) फीस वसूल रहे हैं, जिससे मिडिल क्लास परिवारों पर काफी आर्थिक बोझ एक साथ पड़ता है। अभिवावकों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए DoE ने साफ किया है कि फीस अब मासिक आधार पर ली जाए।
क्या हैं नए निर्देश?
DoE द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सभी निजी और मान्यता प्राप्त स्कूलों को केवल मासिक आधार पर फीस लेने की अनुमति होगी। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करने तक की प्रक्रिया शामिल हो सकती है।
अभिभावकों के लिए राहत क्यों?
पिछले कुछ समय से कई स्कूल एक साथ तिमाही या उससे अधिक अवधि की फीस मांग रहे थे, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों पर अचानक बड़ा आर्थिक दबाव बन रहा था। नए आदेश से अब माता-पिता अपनी आर्थिक योजना बेहतर तरीके से कर सकेंगे और उन्हें एकमुश्त बड़ी रकम देने की मजबूरी नहीं होगी।
स्कूलों की जिम्मेदारी बढ़ी
DoE ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूलों को फीस स्ट्रक्चर पूरी तरह पारदर्शी रखना होगा। किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क या छिपे हुए चार्ज को लेकर शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी। इसके साथ ही स्कूलों को अभिभावकों को फीस से संबंधित पूरी जानकारी समय पर उपलब्ध करानी होगी।
यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में संतुलन बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल अभिभावकों को राहत मिलेगी, बल्कि स्कूलों को भी अपनी वित्तीय नीतियों को अधिक व्यवस्थित और नियमों के अनुरूप बनाना होगा।