बिहार , 13 अप्रैल 2026 । बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है और चर्चा इस बात की है कि क्या इस बार राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बन सकता है। राजनीतिक गलियारों में इस संभावना को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं, जिससे सत्ता समीकरणों पर भी असर पड़ता दिख रहा है।
इस बीच, 14 अप्रैल का दिन भी अहम माना जा रहा है। इस दिन सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मौजूदा मंत्रिपरिषद की अंतिम बैठक होगी। बैठक के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे, जिसके साथ ही वर्तमान सरकार का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें नए नेता का चुनाव किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस प्रक्रिया के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उनकी मौजूदगी में विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम में शिवराज सिंह चौहान की भूमिका को लेकर खास चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व की ओर से उनके जरिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं, और उनकी ‘पर्ची’ यानी सिफारिश या संकेत पर ही मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर अंतिम फैसला हो सकता है।
बिहार में लंबे समय से गठबंधन राजनीति का दौर रहा है, जहां अलग-अलग दलों के बीच तालमेल से सरकारें बनी हैं। ऐसे में अगर बीजेपी अपने दम पर या गठबंधन में प्रमुख भूमिका निभाते हुए मुख्यमंत्री पद हासिल करती है, तो यह राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी इस बार अपने संगठन और जनाधार के दम पर मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और चुनावी परिणामों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी किसे मुख्यमंत्री के तौर पर आगे करती है और क्या वाकई बिहार में पहली बार बीजेपी का सीएम बन पाता है या नहीं। आने वाले दिनों में यह सियासी तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।