SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई — ममता बनर्जी का आरोप चुनाव आयोग पर

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नई दिल्ली, 04 फ़रवरी 2026 ।पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision — SIR) को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई जारी है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर तीखे आरोप लगाए हैं। ममता बनर्जी ने स्वयं अदालत में अपनी याचिका का पक्ष रखा और कहा कि SIR प्रक्रिया को राजनीतिक रूप से बंगाल को टारगेट करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, खासकर आगामी विधानसभा चुनावों से पहले। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में भेदभाव, अतिरिक्त कड़े मानदंड और गलत तरीके अपनाने के कारण सही मतदाताओं के मताधिकार पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले पर सुनवाई की। जहां राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वकीलों के साथ मौजूद रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के निशाने पर है। जो काम 2 साल में होना था, उसे 3 महीने में करवाया जा रहा है।

सुनवाई के बाद CJI सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि असली लोग चुनावी सूची में बने रहने चाहिए। ममता की याचिका पर बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब मांगा।

सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री ने कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं। मुकदमों में आमतौर पर मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं। सुनवाई के दौरान ममता ने चुनाव आयोग को व्यंग्यात्मक तौर पर “व्हाट्सएप आयोग” तक कहा और दलील दी कि आयोग के फैसले लोकतांत्रिक मूल्यों और विधायी निर्देशों के खिलाफ हैं, जिससे आम लोगों का हित प्रभावित हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है और सुनवाई अभी जारी है। यह मामला न सिर्फ मतदाता सूची के तकनीकी पक्ष से जुड़ा है, बल्कि राजनीतिक राजनीति, आयोग की निष्पक्षता और चुनावी माहौल से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर इसे गंभीर रूप से देखा जा रहा है।

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