पुतिन के भारत दौरे से क्या बदला: तेल सप्लाई के भरोसे से लेकर 19 नई डील तक — भारत-रूस साझेदारी के नए चरण पर विस्तृत फोकस

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नई दिल्ली, 06 दिसंबर 2025 । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे ने ऐतिहासिक रणनीतिक रिश्तों में नई ऊर्जा भर दी है। वैश्विक भू-राजनीति में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच यह मुलाकात भारत-रूस संबंधों के लिए निर्णायक मानी जा रही है। इस दौरे में जहां ऊर्जा क्षेत्र में लंबी अवधि की स्थिरता पर महत्वपूर्ण सहमति बनी, वहीं रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार और आर्कटिक सहयोग जैसे 19 महत्वपूर्ण करार India-Russia Partnership को नए चरण में ले जाते हैं।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन अपना 27 घंटे का भारत दौरा पूरा कर वापस लौट गए हैं। उन्होंने शुक्रवार को पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की और बिजनेस फोरम को संबोधित किया।

इस दौरान भारत-रूस के बीच किसी बड़े समझौते के ऐलान नहीं हुआ। इससे पहले रिपोर्ट में दावा किया जा रहा था कि दोनों देशों के बीच SU-57 फाइटर जेट और S-400 डिफेंस सिस्टम को लेकर डील हो सकती है।

हालांकि दोनों देशों के बीच तेल सप्लाई की गारंटी समेत 19 समझौतों पर सहमति बनीं। इनमें कई अहम समझौते भी शामिल हैं।

2.  अहम डील —

(1) रक्षा सहयोग

  • भारत-रूस डिफेंस को-प्रोडक्शन पर बड़ा जोर

  • इंजनों, स्पेयर पार्ट्स और गोला-बारूद की संयुक्त मैन्युफैक्चरिंग

  • ब्रह्मोस मिसाइल तकनीक पर सहयोग को और आगे ले जाने पर चर्चा

(2) न्यूक्लियर एनर्जी

  • कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट के नए यूनिट्स पर प्रगति

  • भविष्य में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर्स पर सहयोग की संभावना

(3) अंतरिक्ष सहयोग

  • मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान और रूस के बीच तकनीकी सहयोग

  • स्पेस स्टेशन उपयोग और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर समझौता

(4) आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग

  • भारत को रूस के आर्कटिक संसाधन विकास और नॉर्दर्न सी रूट में बड़ी भूमिका

  • LNG, ऊर्जा और वैज्ञानिक शोध में सहयोग

(5) व्यापार और निवेश

  • 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य

  • डायरेक्ट इंटरबैंक कनेक्टिविटी और रुपए-रूबल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा

  • इंफ्रास्ट्रक्चर, फर्टिलाइज़र, स्टील और फार्मा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर

(6) शिक्षा व कौशल विकास

  • छात्र विनिमय कार्यक्रमों का विस्तार

  • मेडिकल और टेक्निकल एजुकेशन में संयुक्त संस्थानों की योजना

पुतिन का यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी की पुनर्पुष्टि है। ऊर्जा आपूर्ति का भरोसा, 19 नई डील और रक्षा-अंतरिक्ष सहयोग ने भारत-रूस संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह दौरा आने वाले दशक की भू-राजनीतिक संरचना में भारत की भूमिका को और स्पष्ट करता है।

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