चंडीगढ़, 30 अक्टूबर 2026 | पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल और सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गठबंधन की स्थिति में भाजपा को पहले के मुकाबले लगभग दोगुनी सीटें मिल सकती हैं। पहले अकाली दल के साथ गठबंधन में भाजपा 117 विधानसभा सीटों में से 23 पर चुनाव लड़ती थी। अब उसका दावा करीब 40 से 47 सीटों पर बताया जा रहा है।
हालांकि, दोनों पार्टियों की ओर से अभी तक गठबंधन या सीटों के अंतिम बंटवारे की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए सीटों की संख्या को फिलहाल बातचीत में शामिल संभावित प्रस्ताव के तौर पर ही देखा जा रहा है।
अकाली दल खुद को बनाए रखना चाहता है सीनियर पार्टनर
अकाली दल अधिक सीटें देने के बावजूद गठबंधन में अपनी भूमिका को लेकर स्पष्ट है। वह खुद को गठबंधन का ‘सीनियर पार्टनर’ बनाए रखना चाहता है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे के साथ राजनीतिक नेतृत्व और गठबंधन में हिस्सेदारी का सवाल भी महत्वपूर्ण रहने वाला है। इसके साथी बीजेपी और अकाली दल के बीच बातचीत का दूसरा अहम मुद्दा SAD (पुनर सुरजीत) गुट को गठबंधन में शामिल करना है। बीजेपी के कुछ शीर्ष नेता इस गुट को प्रस्तावित गठबंधन का हिस्सा बनाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। हालांकि, अकाली दल इस गुट को सीटें देने के सवाल पर हिचकिचा रहा है।
अकाली दल रहेगा बड़े भाई की भूमिका में
सूत्रों के मुताबिक, संभावित गठबंधन में अकाली दल बड़े भाई की भूमिका में रहेगा. अगर गठबंधन चुनाव जीतता है, तो मुख्यमंत्री पद पर भी अकाली दल का मजबूत दावा हो सकता है. दूसरी ओर, बीजेपी उन सीटों पर ज्यादा जोर दे रही है, जहां पिछले चुनावों में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा था।
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब में एनडीए की सरकार बनने संबंधी बयान के बाद गठबंधन की चर्चाओं को और बल मिला है. अब तक बीजेपी नेता पंजाब में अपनी पार्टी की सरकार बनाने का दावा करते रहे हैं. एनडीए सरकार का जिक्र दोनों दलों के संभावित साथ आने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के आंतरिक आकलन में भी यह बात सामने आई है कि अकाली दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से गठबंधन की स्थिति मजबूत हो सकती है. हालांकि, 80 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा बीजेपी के आंतरिक आकलन पर आधारित है. इसे चुनावी नतीजा या स्वतंत्र अनुमान नहीं माना जा सकता।
वोटों का गणित क्यों अहम?
दोनों दलों के साथ आने के पीछे उनके वोट बैंक और क्षेत्रीय पकड़ को अहम माना जा रहा है. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पंजाब में करीब 25 लाख वोट यानी 18.56 फीसदी वोट मिले थे. वहीं, अकाली दल को लगभग 18 लाख वोट यानी 13.42 फीसदी वोट मिले. दोनों के वोट जोड़ने पर यह आंकड़ा करीब 43 लाख और कुल वोट प्रतिशत लगभग 32 फीसदी बैठता है।
2022 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल को करीब 28.61 लाख वोट यानी 18.38 फीसदी वोट मिले थे. बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को लगभग 12 लाख वोट यानी 8 फीसदी वोट मिले थे. दोनों का संयुक्त आंकड़ा करीब 40 से 41 लाख वोट तक पहुंचता है।
दूसरी तरफ, 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 42 फीसदी वोट हासिल कर 92 सीटें जीती थीं. कांग्रेस को 22.98 फीसदी वोट मिले थे. वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में AAP का वोट प्रतिशत घटकर 26.30 फीसदी रह गया, जबकि कांग्रेस को 26.02 फीसदी वोट मिले।
गठबंधन की औपचारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल भाजपा और अकाली दल के बीच बातचीत आगे बढ़ने की खबरें हैं, लेकिन अंतिम समझौते पर मुहर लगना बाकी है। सीटों की संख्या, विधानसभा क्षेत्रों का चयन और अकाली दल के अलग हुए गुट की भूमिका जैसे मुद्दों पर सहमति बनने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी।
यदि दोनों दल फिर साथ आते हैं तो 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उनका चुनावी तालमेल एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम होगा। हालांकि, गठबंधन का अंतिम स्वरूप और सीटों का बंटवारा दोनों पार्टियों के आधिकारिक फैसले के बाद ही तय माना जाएगा।