चंडीगढ़, 30 अक्टूबर 2026 | हरियाणा पुलिस ने तीन नए आपराधिक कानूनों को लागू करने के मामले में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। सितंबर 2026 के राष्ट्रीय न्यू क्रिमिनल लॉज डैशबोर्ड पर राज्य शीर्ष पर रहा। पुलिस ने जांच प्रक्रिया से लेकर अदालतों में आरोपियों की पेशी तक डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है। इससे न केवल आपराधिक न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने में मदद मिली है, बल्कि सरकारी खर्च और समय की बचत भी हुई है।
हरियाणा पुलिस की इस उपलब्धि को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा ने राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर 95.28 अंक हासिल किए। इस सूची में असम 94.65 अंकों के साथ दूसरे और चंडीगढ़ 92.80 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
हरियाणा पुलिस ने तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। सितंबर 2026 में राज्य ने राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने दावा किया कि हरियाणा देश का पहला राज्य है, जिसने भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 को पूर्ण रूप से लागू किया है। ये कानून एक जुलाई, 2024 से प्रभावी हुए थे।
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि ई-समन से छह माह में 25.65 करोड़ रुपये मूल्य के ईंधन की बचत दर्ज की गई। वीडियो कान्फ्रेंसिंग से सुनवाई में सात माह के दौरान 1.16 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत हुई। जीरो एफआइआर की साप्ताहिक समीक्षा और सामान्यतः 48 घंटे में नियमित एफआइआर में बदलाव की व्यवस्था भी लागू है।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि नए कानून आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण हैं।
99 फीसदी फॉरेंसिक जांच की रिकॉर्डिंग की गई
हरियाणा पुलिस वैज्ञानिक जांच, तकनीकी नवाचार, प्रशिक्षण और न्यायालयों के साथ बेहतर समन्वय के जरिए न्याय प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में घटनास्थल पर फॉरेंसिंक टीम की शत-प्रतिशत विजिट सुनिश्चित की गई है।
ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से 99.2 प्रतिशत फॉरेंसिंक जांच की रिकार्डिंग की जा रही है। फॉरेंसिंक विज्ञान प्रयोगशालाओं में स्वीकृत पदों की संख्या 351 से बढ़ाकर 1,044 कर दी गई है। प्रत्येक जिले में कम से कम एक मोबाइल फॉरेंसिंक वैन तैनात है, जबकि 17 नई मोबाइल फॉरेंसिंक इकाइयों को मंजूरी दी गई है।
56 हजार कर्मियों का हुआ पंजीकरण
अजय सिंघल के अनुसार हरियाणा पुलिस के सभी कर्मियों को नए कानूनों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं, 56 हजार कर्मियों का आइजीओटी पोर्टल पर पंजीकरण हुआ है, जिनमें से 34,500 ने एआई आधारित पाठ्यक्रम पूरा किया है। राज्य में 2,145 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग क्यूबिकल स्थापित किए गए हैं।
इनके माध्यम से 81.78 प्रतिशत आरोपित अदालतों में पेश हो रहे हैं, जबकि जेलों से आरोपितों की वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी का आंकड़ा 84.49 प्रतिशत है। लगभग 70 प्रतिशत पुलिसकर्मी भी वीडियो कान्फ्रेंसिंग से अदालतों में पेश हो रहे हैं।
डिजिटल पुलिसिंग और न्यायिक व्यवस्था पर जोर
हरियाणा सरकार और पुलिस विभाग का लक्ष्य जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाना है। ई-समन, ई-चार्जशीट, ई-साक्ष्य और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाएं इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर पहला स्थान हासिल करना राज्य की डिजिटल पुलिसिंग व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, इन व्यवस्थाओं की वास्तविक सफलता का आकलन जांच की गुणवत्ता, मामलों के समयबद्ध निपटारे और नागरिकों को मिलने वाले न्याय के आधार पर भी किया जाएगा।