नई दिल्ली,29 अक्टूबर 2026| देश में दवाओं की कीमतों और मरीजों को मिलने वाली राहत से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कई अहम सवाल किए हैं। 27 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) और खुदरा विक्रेताओं को मिलने वाले दाम के बीच बड़े अंतर पर चिंता जताई।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पूछा कि दवाओं की कीमतों में इतना अंतर क्यों है और इसे नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। अदालत ने राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि भारत में दवाओं की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षाकृत कम हैं। सरकार ने यह भी कहा कि दवा क्षेत्र में नियंत्रण और उद्योग के विकास के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
हालांकि, अदालत ने मरीजों की आर्थिक स्थिति और जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता को महत्वपूर्ण बताते हुए मूल्य निर्धारण व्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा।
यह मामला दवाओं की कीमतों को अधिक पारदर्शी बनाने और मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम करने की मांग से जुड़ा है। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने संबंधित याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
अदालत के अंतिम आदेश से दवाओं की कीमतों के नियमन और मरीजों को मिलने वाली राहत पर आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।