चांदनी चौक में BJP की पदयात्रा से व्यापार प्रभावित होने की चिंता

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नई दिल्ली, 29 अक्टूबर 2026 | दिल्ली में दीपावली के आसपास राजनीतिक कार्यक्रमों और व्यापारिक गतिविधियों को लेकर बहस तेज हो गई है। बीजेपी की ओर से चांदनी चौक में निकाली गई ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा पर एक्टिविस्टों और व्यापार से जुड़े लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और कारोबार सबसे अहम होता है, तो ऐसे समय में राजनीतिक जुलूसों के प्रभाव पर भी समान रूप से विचार किया जाना चाहिए।

यह बहस कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन की 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों की ओर से जताई गई चिंताओं के बीच सामने आई है।

राजनीतिक एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर सवाल किया कि क्या दिल्ली के सबसे व्यस्त बाजार चांदनी चौक में मंच लगाकर प्रदर्शन करने के लिए BJP ने पुलिस से 10 दिन पहले इजाजत ली थी या यह बिना इजाजत हुआ। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी पूछा कि क्या पदयात्रा किसी तय विरोध स्थल पर हो रही थी और त्योहार के दौरान व्यापार पर पड़ने वाले असर का क्या हुआ।

चांदनी चौक में बीजेपी की पदयात्रा पर क्यों उठे सवाल?

28 अक्टूबर को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में चांदनी चौक इलाके में पदयात्रा निकाली गई। इसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता शामिल हुए। यह यात्रा जैन लाल मंदिर से टाउन हॉल चौक तक निकाली गई।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या यह पदयात्रा किसी निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर आयोजित की जा रही थी। उन्होंने त्योहारों के दौरान व्यापार पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई।

CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए व्यापारियों की स्थिति पर सवाल उठाए। इन टिप्पणियों के बाद राजनीतिक कार्यक्रमों और बाजारों की सामान्य गतिविधियों के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज हुई।

व्यापारियों का कहना है—त्योहारी सीजन में बाजार बाधित न हों

दिल्ली के प्रमुख बाजारों में त्योहारों के दौरान ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है। चांदनी चौक जैसे व्यस्त व्यापारिक इलाके में जुलूस, बैरिकेडिंग और यातायात में बदलाव से दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होने की आशंका रहती है।

चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने भी बीजेपी की पदयात्रा पर आपत्ति जताई थी। संगठन के मुताबिक, बीजेपी नेताओं ने उसे आश्वासन दिया था कि यात्रा में करीब 400 लोग शामिल होंगे और कार्यक्रम लगभग एक से डेढ़ घंटे में पूरा हो जाएगा। बीजेपी की ओर से कहा गया कि पदयात्रा सांकेतिक होगी और व्यापारियों को असुविधा से बचाने के लिए इंतजाम किए गए हैं।

हालांकि, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पदयात्रा के मद्देनजर चांदनी चौक के कुछ हिस्सों में दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक यातायात प्रतिबंधों और डायवर्जन की सूचना दी थी। इससे व्यापारिक गतिविधियों पर संभावित असर को लेकर चिंता बनी रही।

कांग्रेस की रैली पर भी व्यापारिक संगठनों ने जताई चिंता

दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली प्रस्तावित है। इस रैली में विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी कर रहे हैं।

CTI ने आशंका जताई है कि रैली के कारण यातायात प्रतिबंध, बैरिकेडिंग और ग्राहकों की आवाजाही में कमी से आसपास के बाजार प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने दावा किया कि इसका असर दिल्ली के 20 से अधिक प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों पर पड़ सकता है। व्यापारिक संगठनों ने विपक्षी नेताओं से रैली को दीपावली के बाद आयोजित करने की अपील भी की है।

हालांकि, कारोबार को होने वाले संभावित नुकसान के अलग-अलग आंकड़े विभिन्न बयानों में सामने आए हैं। इन्हें वास्तविक नुकसान के प्रमाण के बजाय व्यापारिक संगठनों की आशंका या अनुमान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पवन खेड़ा ने बीजेपी के रुख पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी के रुख को लेकर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि यदि विपक्ष की रैली से व्यापारियों को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, तो बीजेपी के राजनीतिक कार्यक्रमों के व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी सवाल पूछे जाने चाहिए।

इस बहस का मूल मुद्दा राजनीतिक दलों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की आजीविका के बीच संतुलन बनाना है। एक ओर राजनीतिक दल शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हैं, वहीं दूसरी ओर व्यापारी चाहते हैं कि बाजारों की आवाजाही और बिक्री प्रभावित न हो।

बीजेपी ने क्या दिया जवाब?

बीजेपी नेताओं ने कहा कि चांदनी चौक में निकाली गई पदयात्रा सांकेतिक थी और इसे व्यापारिक गतिविधियों को बाधित किए बिना आयोजित करने की योजना बनाई गई थी। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहेगा और व्यापारियों को नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।

इस तरह बीजेपी ने अपनी पदयात्रा और विपक्ष की प्रस्तावित बड़ी रैली के पैमाने में अंतर बताया। दूसरी ओर, आलोचकों का सवाल है कि व्यापारियों के हितों को लेकर एक समान मानक सभी राजनीतिक दलों पर लागू होना चाहिए।

व्यापार और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी

चांदनी चौक की पदयात्रा को लेकर उठा विवाद केवल बीजेपी या कांग्रेस तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी सामने लाता है कि व्यस्त बाजारों में राजनीतिक कार्यक्रमों की योजना बनाते समय व्यापारियों, ग्राहकों, स्थानीय निवासियों और यातायात व्यवस्था का ध्यान कैसे रखा जाए।

त्योहारी सीजन में बाजारों तक आसान पहुंच बनाए रखना कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रदर्शन भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। ऐसे में कार्यक्रमों की अवधि, मार्ग, भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को लेकर पहले से स्पष्ट योजना बनाने से दोनों पक्षों की चिंताओं को कम किया जा सकता है।

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