नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2026| देश में एसिड अटैक की घटनाओं को रोकने और इसकी आसान उपलब्धता पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने को कहा है। अदालत ने चिंता जताई कि दिशा-निर्देश जारी होने के बावजूद एसिड की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारों को उनके पालन की निगरानी करनी होगी और लापरवाही के मामलों में जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।
अदालत ने खुले बाजार में एसिड की खुदरा बिक्री की आवश्यकता पर सवाल उठाया। साथ ही, यह पहचानने की जरूरत बताई कि किन कामों के लिए एसिड वास्तव में जरूरी है और कहां सुरक्षित विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं। जहां इसका उपयोग अनिवार्य हो, वहां बिक्री को नियंत्रित और निगरानी के दायरे में रखने पर विचार किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान एसिड हमले के पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास का मुद्दा भी उठा। अदालत ने पीड़ितों को उचित चिकित्सा सुविधा, आर्थिक सहायता और सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी व्यवस्थाओं पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
यह मामला अब केवल बिक्री पर रोक लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और पीड़ितों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने से भी जुड़ा है। अदालत की इस पहल से एसिड की बिक्री को लेकर सख्त निगरानी और जवाबदेही पर आगे चर्चा होने की उम्मीद है।