हरियाणा की चीनी मिलों में बनेगा एथेनॉल, किसानों को होगा फायदा!

0

सोनीपत, 29 अक्टूबर 2026 | हरियाणा में सहकारी चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधारने और गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने एथेनॉल उत्पादन की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर एथेनॉल प्लांट लगाने की संभावनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बैठक में मिलों की उत्पादन क्षमता, तकनीकी जरूरतों और आर्थिक व्यवहार्यता पर चर्चा हुई।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चीनी मिलों की आय बढ़ाने के लिए नए विकल्प तलाशे जाएं। इसके साथ ही आगामी गन्ना पेराई सत्र की तैयारियों की समीक्षा करते हुए किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने देने पर जोर दिया गया।

प्रदेश की चीनी मिलों में अब एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया को तेज गति दी जाएगी। इस संबंध में बुधवार को राई स्थित एथनिक इंडिया पर्यटन केंद्र में प्रदेश की सभी शुगर मिलों के अधिकारियों के साथ कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने बैठक की। इस दौरान सभी शुगर मिलों के एमडी से तकनीकी पहलुओं को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है।

शुगरफेड अधिकारियों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

गन्ना उत्पादकों का लाभ बढ़ाने और एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बैठक में कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। इसमें मंत्री ने शुगरफेड अधिकारियों से सारी जानकारी मांगते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। इस बीच आगामी गन्ना पेराई सत्र की तैयारियों की समीक्षा भी की गई। मंत्री ने गन्ना किसानों को किसी भी तरह की कोई परेशानी न होने देने के सख्त निर्देश भी दिए हैं।

चीनी मिलों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर

वहीं, गन्ने की खेती का दायरा बढ़ाने के लिए अधिकारियों से सुझाव भी मांगे गए हैं। मंत्री ने जोर दिया कि गन्ना उत्पादक किसानों को अधिक से अधिक आर्थिक लाभ दिलाने के लिए समस्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने चीनी मिलों की कार्यक्षमता बढ़ाने और किसानों की सुविधाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। मंत्री ने बैठक में स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

चीनी मिलों में एथेनॉल प्लांट लगाने की योजना क्या है?

हरियाणा सरकार सहकारी चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उनकी आय के अन्य स्रोत विकसित करना चाहती है। इसी उद्देश्य से मिलों में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया को गति देने पर विचार किया जा रहा है।

राई स्थित एथनिक इंडिया पर्यटन केंद्र में हुई समीक्षा बैठक के दौरान शुगरफेड और प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों के प्रबंध निदेशकों के साथ इस विषय पर चर्चा की गई। अधिकारियों से प्लांट लगाने की तकनीकी आवश्यकताओं, लागत और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन करने को कहा गया है।

हालांकि, अभी सभी चीनी मिलों में प्लांट लगाने की अंतिम समयसीमा, कुल निवेश और उत्पादन क्षमता का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं हुआ है। फिलहाल सरकार का जोर संभावनाओं का आकलन करने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर है।

गन्ना किसानों को कैसे मिल सकता है फायदा?

एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है। यदि मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, तो इससे गन्ना खरीद और किसानों के भुगतान से जुड़ी व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसानों को सीधा आर्थिक लाभ कितना मिलेगा, यह मिलों की लागत, उत्पादन, बिक्री और भुगतान व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

सरकार ने बैठक में गन्ना किसानों के हितों को प्राथमिकता देने और आगामी पेराई सत्र में खरीद प्रक्रिया सुचारु रखने के निर्देश दिए। मंत्री ने अधिकारियों से गन्ने की खेती का दायरा बढ़ाने के लिए सुझाव भी मांगे हैं।

एथेनॉल प्लांट के साथ-साथ सरकार सहकारी चीनी मिलों की खाली पड़ी जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने की योजना पर भी काम कर रही है। इस जमीन पर वेयरहाउस बनाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

वेयरहाउस से मिलों को अतिरिक्त आय हासिल करने का अवसर मिल सकता है। वहीं, भंडारण सुविधाओं के विकास से आसपास की कृषि और कारोबारी गतिविधियों को भी मदद मिल सकती है। सरकार का लक्ष्य सहकारी चीनी मिलों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और लगातार हो रहे घाटे को कम करना है।

घाटे में चल रही मिलों की भी होगी समीक्षा

समीक्षा बैठक में मंत्री ने चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति और उत्पादन क्षमता पर भी चर्चा की। बेहतर प्रदर्शन करने वाली मिलों को प्रोत्साहित करने की बात कही गई, जबकि लगातार घाटे में चल रही मिलों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों को अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने, तकनीकी व्यवस्था सुधारने और उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, आगामी पेराई सत्र से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने पर जोर दिया गया, ताकि गन्ना लेकर आने वाले किसानों को परेशानी न हो।

एथेनॉल उत्पादन को लेकर एक जरूरी बात

एथेनॉल पेट्रोल में मिश्रण के लिए इस्तेमाल होने वाला जैव ईंधन है। इसे अलग-अलग कच्चे माल से बनाया जा सकता है। चीनी उद्योग में इसकी उपलब्धता गन्ने के रस, शीरे और लागू सरकारी नियमों पर निर्भर करती है।

केंद्र सरकार ने एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने के रस, चीनी और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल बनाने पर प्रतिबंध संबंधी निर्देश जारी किए हैं, ताकि चीनी की उपलब्धता प्रभावित न हो। सी-हैवी शीरे सहित अन्य अनुमत स्रोतों के उपयोग पर संबंधित नियम लागू होंगे। इसलिए हरियाणा में प्रस्तावित प्लांटों की उत्पादन योजना भी उस समय लागू केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप बनानी होगी।

हरियाणा सरकार की इस पहल का अगला चरण चीनी मिलों की रिपोर्ट और तकनीकी आकलन पर निर्भर करेगा। रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन मिलों में एथेनॉल प्लांट लगाने की संभावना है, कितने निवेश की जरूरत होगी और परियोजनाओं को किस तरह लागू किया जा सकता है।

यदि योजनाएं व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ती हैं, तो सहकारी चीनी मिलों की आय के नए रास्ते खुल सकते हैं। साथ ही, गन्ना किसानों के भुगतान और पेराई सत्र की व्यवस्थाओं को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है। लेकिन किसानों की आय में वास्तविक बढ़ोतरी का आकलन ठोस परियोजना और उसके परिणाम सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.