हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में दवाओं का ऑनलाइन रिकॉर्ड अनिवार्य
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को दवाओं की खरीद, उपलब्धता और खपत का रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। व्यवस्था का उद्देश्य दवाओं की कमी पर नजर रखना और मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है।
चंडीगढ़, 26 अक्टूबर 2026। हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ऑनलाइन रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों को दवाओं की खरीद, उपलब्ध स्टॉक और खपत का विवरण डिजिटल पोर्टल पर दर्ज करना होगा। इससे अधिकारियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस अस्पताल में कौन-सी दवा उपलब्ध है और किन दवाओं की दोबारा आपूर्ति की आवश्यकता है।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने सिविल सर्जनों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने और दवाओं के रिकॉर्ड की निगरानी करने को कहा है। पोर्टल पर दर्ज जानकारी और अस्पताल में मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर मिलने पर संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
दवाओं की खरीद और खपत का रिकॉर्ड क्यों जरूरी?
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर दवाएं उपलब्ध कराना स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार किसी दवा की मांग बढ़ने, आपूर्ति में देरी या स्टॉक का सही हिसाब नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
ऑनलाइन रिकॉर्ड से अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता की निगरानी आसान हो सकती है। अधिकारियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि कौन-सी दवाएं कम हो रही हैं, किन दवाओं की मांग बढ़ रही है और कहां अतिरिक्त आपूर्ति की जरूरत है।
रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पर होगी जवाबदेही
निर्देशों के अनुसार, पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और अस्पताल में मौजूद दवाओं का रिकॉर्ड एक-दूसरे से मेल खाना चाहिए। यदि रिकॉर्ड में दवा उपलब्ध दिखाई जाती है, लेकिन वास्तविक स्टॉक में वह नहीं मिलती, तो संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय की जा सकती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य दवाओं के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाना और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
मरीजों को क्या फायदा हो सकता है?
ऑनलाइन निगरानी से डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन को दवाओं की उपलब्धता की जानकारी आसानी से मिल सकती है। इससे दवाओं की कमी का पहले पता लगाने और समय पर उनकी आपूर्ति की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
हरियाणा सरकार ने पहले भी सरकारी अस्पतालों में दवाओं का वास्तविक समय में रिकॉर्ड रखने और अनावश्यक रूप से बाहर से दवाएं खरीदने के लिए कहने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मार्च 2026 में कहा था कि यदि अस्पताल में कोई दवा उपलब्ध नहीं है और डॉक्टर बाहर से दवा लिखते हैं, तो इसकी वजह मरीज की ओपीडी पर्ची पर स्पष्ट दर्ज होनी चाहिए। निर्देशों के अनुपालन की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को दी गई थी।
आगे क्या होगा?
इस व्यवस्था की प्रभावशीलता नियमित रिकॉर्ड अपडेट करने, दवाओं की उपलब्धता की निगरानी और जरूरत के अनुसार समय पर खरीद पर निर्भर करेगी। मरीजों को इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब ऑनलाइन रिकॉर्ड के साथ अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित हो।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में दवा प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाना और मरीजों को इलाज के दौरान होने वाली अनावश्यक परेशानी कम करना है।