परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: बुलडोजर कार्रवाई के बाद CBI के सामने सबूत जुटाने की चुनौती

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चंडीगढ़, 22 अक्टूबर 2026। पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच शुरू कर दी है। हालांकि, वारदात के बाद आरोपी की मेडिकल स्टोर पर हुई बुलडोजर कार्रवाई, तोड़फोड़ और आगजनी ने घटनास्थल से सबूत जुटाने को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। अब जांच एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि गोलीबारी के समय घटनास्थल पर क्या हुआ था और घटना से जुड़े साक्ष्यों को किस तरह सुरक्षित किया जा सकता है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, झोटा की 13 अक्टूबर 2026 को मानसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके अगले दिन आरोपी की दुकान के एक हिस्से को प्रशासन ने गिराया। बाद में दुकान के बाकी हिस्से में तोड़फोड़ और आगजनी की घटना भी हुई। ऐसे में घटनास्थल की मूल स्थिति बदल गई है। हालांकि, इससे जांच के सभी रास्ते बंद नहीं होते। CBI के पास अन्य दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर घटनाक्रम को समझने के विकल्प मौजूद हैं।

हत्या के बाद 14 अक्टूबर को जिला प्रशासन ने आरोपी की दुकान के एक हिस्से को गिराया था। इसके बाद भीड़ ने दुकान के शेष हिस्से को भी तोड़कर आग लगा दी। आरोपी के मकान के अवैध निर्माण वाले हिस्से पर भी कार्रवाई की गई थी। इस घटनाक्रम के कारण CBI के लिए वारदात के समय की स्थिति को दोबारा समझना मुश्किल हो सकता है। जांच एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि गोलीबारी के दौरान झोटा और आरोपी कहां मौजूद थे, विवाद किस जगह शुरू हुआ और घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा। इसके लिए शुरुआती पुलिस जांच के रिकॉर्ड, तस्वीरों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की मदद ली जा सकती है।

लाइव वीडियो और डिजिटल रिकॉर्ड बन सकते हैं अहम कड़ी

रिपोर्टों के अनुसार, घटना के समय झोटा फेसबुक लाइव कर रहे थे। ऐसे में उपलब्ध वीडियो फुटेज, मोबाइल फोन का डेटा और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि, किसी वीडियो या रिकॉर्डिंग की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह उपलब्ध है या नहीं, उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि होती है या नहीं और उसमें घटना से जुड़े कौन-से तथ्य दिखाई देते हैं।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, CBI टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की टीम ने वहां से नमूने जुटाए। रिपोर्ट में घटनास्थल से डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) जब्त किए जाने का भी उल्लेख है। इन साक्ष्यों की जांच से घटना से जुड़ी परिस्थितियों को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।

स्थानीय पुलिस के रिकॉर्ड और गवाहों के बयान भी अहम

CBI ने मामले की FIR दोबारा दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली है। शुरुआती कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने स्थानीय पुलिस से केस से जुड़े दस्तावेज और जब्ती रिकॉर्ड लिए। अब जांच में उन लोगों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं, जिन्होंने गोलीबारी देखी, घटना के दौरान घायल हुए या वारदात से पहले और बाद की परिस्थितियों के बारे में जानकारी रखते हैं।

इसके अलावा, घटनास्थल के आसपास की दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों से उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, फोन कॉल रिकॉर्ड और घटनाक्रम से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच भी उपयोगी हो सकती है। इन सभी जानकारियों का आपस में मिलान करके जांच एजेंसी घटनाओं का क्रम तय करने की कोशिश कर सकती है।

हत्या के मामले में फॉरेंसिक जांच की भूमिका

फॉरेंसिक विशेषज्ञ घटनास्थल से मिले नमूनों, हथियार से जुड़े साक्ष्यों और उपलब्ध डिजिटल सामग्री का परीक्षण कर सकते हैं। यदि घटनास्थल का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है, तब भी बचे हुए नमूनों और पहले से दर्ज रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण रहती है। साथ ही, साक्ष्य किस स्थिति में मिले, उन्हें किसने एकत्र किया और जांच के दौरान उनकी सुरक्षा कैसे की गई—इन बातों का दस्तावेजी रिकॉर्ड भी अहम होता है।

इस मामले में CBI की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि कौन-से साक्ष्य सुरक्षित बचे हैं और वे वारदात की परिस्थितियों को समझने में कितनी मदद कर सकते हैं। इसलिए बुलडोजर कार्रवाई को जांच में एक चुनौती माना जा सकता है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच और गवाहों के बयानों के बाद ही निकाला जा सकेगा।

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद मानसा में विरोध प्रदर्शन हुए और परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की। अब CBI की जिम्मेदारी है कि वह घटनास्थल से बचे साक्ष्यों, पुलिस रिकॉर्ड, डिजिटल फुटेज और गवाहों के बयानों को जोड़कर मामले की कड़ियां स्पष्ट करे।

आरोपी की दुकान पर हुई कार्रवाई के कारण जांच की प्रक्रिया जटिल हो सकती है, लेकिन मामले की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच एजेंसी उपलब्ध सबूतों की कितनी प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से पड़ताल करती है। फिलहाल, जांच के अंतिम नतीजे और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का पूरा विवरण सामने आना बाकी है।

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