देहरादून, 28 सितंबर 2026 । उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक, साहसिक, आध्यात्मिक और डिजिटल पर्यटन पर जोर दिया जा रहा है। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य के पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने पर्यटन को स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी जोर दिया।
पर्यटन मंत्री महाराज ने कहा कि प्रदेश में होम स्टे एक वरदान साबित हो रहा है। अब तक राज्य में 6000 से अधिक पंजिकृत होम स्टे संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा इन गतिविधियों से युवाओं को रोजगार मिल रहा है। पिछले सप्ताह हमने प्रदेश के 100 ट्रेकिंग मार्गों की GPS एवं GIS मैपिंग हेतु दलों को रवाना किया, जिनमें 50 मार्ग गढ़वाल और 50 मार्ग कुमाऊँ के थे। इसके आधार पर एक मोबाइल ट्रेकिंग नेविगेशन ऐप और “द ट्रेक्स ऑफ उत्तराखण्ड” कॉफी टेबल बुक तैयार की जाएगी। सटीक जानकारी से ट्रेकिंग अधिक सुरक्षित होगी और हमारे ट्रेक विश्व भर के ट्रेकर्स तक पहुंचेंगे।
100 ट्रेकिंग रूट की GPS-GIS मैपिंग
पर्यटन मंत्री के मुताबिक राज्य के 100 ट्रेकिंग मार्गों की GPS और GIS मैपिंग के लिए सर्वे टीमों को रवाना किया गया है। इनमें 50 मार्ग गढ़वाल और 50 मार्ग कुमाऊं क्षेत्र के हैं।
मैपिंग के बाद इन रास्तों की डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मोबाइल ट्रेकिंग नेविगेशन ऐप तैयार करने की योजना है। इसके साथ ही ‘द ट्रेक्स ऑफ उत्तराखण्ड’ नाम से कॉफी टेबल बुक भी तैयार की जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे ट्रेकिंग मार्गों की जानकारी और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के साथ एडवेंचर टूरिज्म को भी बढ़ाने की योजना है। सतपाल महाराज ने कहा कि साहसिक पर्यटन राज्य की प्रमुख पहचान बन रहा है।
आदि कैलाश परिक्रमा 2.0, आदि कैलाश परिक्रमा रन और नीति वैली अल्ट्रा जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन के नए केंद्रों के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। अक्टूबर 2026 में आदि कैलाश परिक्रमा 2.0 और नवंबर में हिमालयन कार रैली का आयोजन प्रस्तावित है।
83 हिमालयी चोटियां भी पर्वतारोहण के लिए खुलीं
राज्य में पर्वतारोहण और साहसिक पर्यटन को विस्तार देने के लिए 83 प्रमुख हिमालयी चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए खोले जाने की जानकारी भी सामने आई है। इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड को देश-विदेश के पर्वतारोहियों और एडवेंचर टूरिज्म से जुड़े यात्रियों के लिए आकर्षक गंतव्य के रूप में विकसित करना है।
इस क्षेत्र में पर्यटन बढ़ने से गाइड, होम स्टे, परिवहन, स्थानीय उत्पाद और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
उत्तराखंड में पर्यटन को केवल चारधाम यात्रा तक सीमित रखने के बजाय पूरे साल पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है। शीतकालीन पर्यटन, स्नो ट्रेकिंग, एस्ट्रो टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
राज्य सरकार की पर्यटन योजनाओं में धार्मिक स्थलों के साथ प्राकृतिक और साहसिक पर्यटन स्थलों को भी जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे अलग-अलग मौसम में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
सतपाल महाराज ने उत्तराखंड को आध्यात्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया। इसके तहत विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक सर्किटों को विकसित करने की बात कही गई है।
राज्य सरकार की ओर से शाक्त, शैव और वैष्णव परंपराओं से जुड़े स्थलों के अलावा विवेकानंद, नरसिंह, गोल्ज्यू, गुरुद्वारा, नवग्रह, नागराजा, हनुमान और महासू देवता सर्किटों की योजना बताई गई है।
रोपवे और इंफ्रास्ट्रक्चर से आसान होगी तीर्थयात्रा
उत्तराखंड में पर्यटन के साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य सरकार की जानकारी के मुताबिक केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए बड़े रोपवे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं।
केदारनाथ के लिए सोनप्रयाग से 12.9 किलोमीटर और हेमकुंड साहिब के लिए गोविंदघाट से 12.4 किलोमीटर लंबे रोपवे प्रोजेक्ट का उल्लेख सरकारी पर्यटन योजनाओं में किया गया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य तीर्थयात्रियों की यात्रा को आसान और सुविधाजनक बनाना है।
विश्व पर्यटन दिवस 2026 की थीम डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए पर्यटन में बदलाव पर केंद्रित है। सतपाल महाराज के अनुसार उत्तराखंड भी पर्यटन क्षेत्र को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।
ट्रेकिंग रूट की डिजिटल मैपिंग, नेविगेशन ऐप और पर्यटन स्थलों की बेहतर डिजिटल जानकारी इसी दिशा में उठाए जा रहे कदमों में शामिल हैं। इससे यात्रियों को यात्रा की योजना बनाने और पर्यटन स्थलों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
पर्यटन को स्थानीय रोजगार से जोड़ने की कोशिश
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार की मौजूदा योजनाओं में पर्यटन गतिविधियों को स्थानीय लोगों की आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
होम स्टे, ट्रेकिंग, धार्मिक पर्यटन, एडवेंचर स्पोर्ट्स, स्थानीय उत्पाद और परिवहन जैसी गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में आर्थिक अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
सतपाल महाराज के बयान के मुताबिक, उत्तराखंड में पर्यटन विकास की रणनीति अब धार्मिक यात्राओं के साथ डिजिटल, साहसिक, आध्यात्मिक और सालभर चलने वाली पर्यटन गतिविधियों को भी जोड़ रही है।