चंडीगढ़ , 28 सितंबर 2026 । पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले सरकारी आवास को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। चंडीगढ़ में पंजाब सरकार के मंत्रियों के लिए आवंटित बंगलों के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। विवाद के केंद्र में AAP की पंजाब ऑब्जर्वर और राजस्थान महिला विंग की प्रमुख गायत्री बिश्नोई हैं। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने उनके सरकारी आवास में रहने को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि गायत्री बिश्नोई ने आरोपों को खारिज करते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
ऐसे शुरू हुआ गायत्री बिश्नोई विवाद
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने X पर एक वीडियो जारी किया। इसमें आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि गायत्री बिश्नोई, मंत्री रवजोत सिंह को आवंटित सरकारी बंगले नंबर 960 में मनीष सिसोदिया के साथ रह रही हैं। सुखपाल सिंह खैरा ने सवाल उठाया कि पंजाब सरकार में मंत्री न होने के बावजूद AAP नेता चुने हुए मंत्रियों को आवंटित सरकारी आवासों में क्यों रह रहे हैं?
गायत्री बिश्नोई ने क्या सफाई दी?
गायत्री बिश्नोई ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के सरकारी आवास में रह रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता का चंडीगढ़ में इलाज चल रहा है और इसी वजह से वह अपने माता-पिता के साथ वहां रह रही हैं।
बिश्नोई का कहना है कि यह व्यवस्था स्वास्थ्य मंत्री की अनुमति से हुई है। उन्होंने सुखपाल खैरा पर व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
सुखपाल खैरा के आरोपों में AAP नेता और पंजाब में पार्टी के प्रभारी मनीष सिसोदिया का नाम भी सामने आया। खैरा ने दावा किया कि बंगला नंबर 960, जो मंत्री रवजोत सिंह को आवंटित है, उसमें सिसोदिया के रहने को लेकर सवाल हैं।
खैरा ने यह भी सवाल उठाया कि जिन नेताओं के पास पंजाब सरकार में मंत्री पद नहीं है, उन्हें मंत्रियों के लिए निर्धारित सरकारी आवासों में रहने की अनुमति किस आधार पर दी गई। ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि के लिए आधिकारिक आवास आवंटन रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।
पंजाब महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान
मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। पंजाब राज्य महिला आयोग ने भी खैरा की टिप्पणियों का संज्ञान लिया है। आयोग की चेयरपर्सन राज लाली गिल ने कहा कि किसी महिला की गरिमा को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस बीच गायत्री बिश्नोई ने भी खैरा के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही है। इस तरह सरकारी आवास से शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत आरोपों और कानूनी कार्रवाई की संभावनाओं तक पहुंच गया है।
अकाली दल ने भी सरकार से पूछे सवाल
विवाद में शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने सरकारी आवास के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए यह जानने की मांग की कि कौन व्यक्ति किस सरकारी मकान में रह रहा है और बिजली-पानी के बिल कौन चुका रहा है।
मजीठिया ने यह भी सवाल उठाया कि अगर इलाज के लिए चंडीगढ़ आने वाले किसी आम नागरिक को ऐसी सुविधा नहीं मिलती, तो सरकारी आवास के इस्तेमाल के नियम क्या हैं। ये सवाल राजनीतिक दलों की ओर से उठाए गए हैं और इनके जवाब के लिए सरकारी रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी सरकारी बंगलों के कथित अनधिकृत इस्तेमाल का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सरकार से ऐसे आवास खाली कराने और यदि नियमों का उल्लंघन साबित हो तो निर्धारित या दंडात्मक किराया वसूलने की मांग की है।
इससे विवाद का दायरा गायत्री बिश्नोई के मामले से आगे बढ़कर पंजाब में सरकारी आवासों के आवंटन और इस्तेमाल की पूरी व्यवस्था तक पहुंच गया है।
सरकारी आवासों को लेकर पंजाब में यह पहली बार विवाद नहीं है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2025 में भी चंडीगढ़ के सेक्टर-39ए में मंत्रियों के लिए निर्धारित कुछ बंगलों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे। उस समय भी मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन से जुड़े आवासों को लेकर चर्चा हुई थी।
अब 2026 में गायत्री बिश्नोई से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद विपक्ष ने पुराने सवालों को फिर उठाना शुरू कर दिया है।
चुनाव से पहले क्यों अहम है यह विवाद?
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ा मुद्दा राजनीतिक रूप से चर्चा में है। विपक्ष AAP सरकार से आवास आवंटन और वास्तविक कब्जे की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है, जबकि गायत्री बिश्नोई ने अपने मामले में स्वास्थ्य मंत्री की अनुमति होने की बात कही है।
अब इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े हैं—किस बंगले का आधिकारिक आवंटन किसे है, वहां कौन रह रहा है, रहने की अनुमति किसने दी और उसके लिए क्या नियम लागू होते हैं। इन सवालों के आधिकारिक जवाब सामने आने के बाद ही आवास संबंधी आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी।