पटना , 24 सितंबर 2026 । विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद तीखी और विवादित टिप्पणी की है। 24 सितंबर 2026 को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सहनी ने कहा कि अगर उन्हें एक हत्या माफ होने की छूट होती तो वह ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते। उन्होंने साथ ही कहा कि वह संविधान को मानने वाले व्यक्ति हैं।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि देश के कर्ताधर्ता प्रधानमंत्री यही करवा रहे हैं। लोकतंत्र को कुचला जा रहा है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान को कुचला जा रहा है। देश के 140 करोड़ लोगों की आंख में पट्टी बांधकर धकेला जा रहा है। चुनाव किसी नेता के लिए नहीं होता है। चुनाव देश की जनता के लिए होता है। जनता को पावर है कि अगर नेता सही से काम न करे तो कुर्सी से हटा दो।
मुकेश सहनी ने चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने पश्चिम बंगाल और बिहार में चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी कई दावे किए। ये दावे सहनी की राजनीतिक टिप्पणियां हैं और उनके सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या बोले सहनी?
सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाते हुए गोली मारने वाली टिप्पणी की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ज्ञानेश कुमार को जवाबदेही का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने 2029 के चुनाव और संभावित राजनीतिक बदलाव को लेकर भी अपनी बात रखी।
मतदाता सूची और SIR को लेकर भी विवाद
मुकेश सहनी का बयान ऐसे समय आया है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने तथा फॉर्म-6 और मतदाता डेटा प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
इन दावों के बीच चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसलों समेत आयोग के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि विचार-विमर्श के दौरान व्यक्तिगत राय या टिप्पणियों को आयोग के अलग-अलग फैसले के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
बयान के बाद राजनीतिक हलचल
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सहनी की टिप्पणी के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। बयान का एक हिस्सा सीधे हिंसा की बात करता है, जबकि सहनी ने उसी बयान में संविधान में विश्वास रखने की बात भी कही। अब इस टिप्पणी पर चुनाव आयोग, राजनीतिक दलों और अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।