लखनऊ में नकली नोटों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 1 लाख के बदले 2.5 लाख की जाली करेंसी
लखनऊ, 16 सितंबर 2026। लखनऊ में पुलिस ने नकली नोटों की सप्लाई करने वाले एक गिरोह का खुलासा करते हुए दो सगे भाइयों मोहम्मद मुस्तकीम और मोहम्मद सुलेमान को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी एक लाख रुपये की असली करेंसी के बदले ढाई लाख रुपये के नकली नोट उपलब्ध कराते थे। दोनों के पास से 30 हजार रुपये मूल्य की नकली करेंसी और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। मामले की जांच अब दिल्ली तक पहुंच गई है, जहां बैठा उनका चचेरा भाई हारून इस नेटवर्क का संचालन करने वाला मुख्य सदस्य बताया जा रहा है।
गिरफ्तारी के दौरान अभियुक्तों के कब्जे से 30 हजार के नकली नोट और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस की ओर से की गई जांच में सामने आया है कि दोनों भाई दिल्ली में बैठे अपने चचेरे भाई के इशारे पर लखनऊ में जाली नोट खपाने का काम कर रहे थे। इतना ही नहीं, ये गैंग 1 लाख के असली नोटों के बदले 2.5 लाख के नकली नोटों की सप्लाई करता था।
दुर्गापुरी मेट्रो स्टेशन के पास हुई गिरफ्तारी
नाका पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों भाइयों को दुर्गापुरी मेट्रो स्टेशन के पास स्थित झोपड़पट्टी इलाके से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी उन्नाव के हसनगंज क्षेत्र के सराय हसनगंज के रहने वाले हैं।
तलाशी के दौरान उनके पास से 30 हजार रुपये की नकली करेंसी बरामद हुई। पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए हैं, जिनमें मौजूद कॉल डिटेल और चैट के जरिए नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
1 लाख असली के बदले 2.5 लाख नकली नोट
पूछताछ में पुलिस को आरोपियों से कथित तौर पर पता चला कि गिरोह का तरीका काफी सुनियोजित था। ग्राहक से एक लाख रुपये की असली रकम लेने के बदले उसे ढाई लाख रुपये की नकली करेंसी देने की डील की जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, दोनों भाई नकली नोट तैयार नहीं करते थे बल्कि दिल्ली से आने वाली खेप को ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार दोनों भाइयों का चचेरा भाई हारून दिल्ली में बैठकर नेटवर्क को संचालित करता था, ऐसा पुलिस का कहना है। हारून ही ग्राहकों की जानकारी जुटाने, मिलने की जगह तय करने और नकली नोटों की सप्लाई की व्यवस्था करने में भूमिका निभाता था।
पुलिस के मुताबिक, हारून की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है और उसे पकड़ने के लिए टीम भेजने की तैयारी है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि उसे नकली नोट कहां से मिलते थे।
WhatsApp लोकेशन और शर्ट के रंग से होती थी पहचान
पुलिस के अनुसार, गिरोह डिलीवरी के दौरान पहचान के लिए एक खास तरीका इस्तेमाल करता था। हारून WhatsApp के जरिए डिलीवरी की लोकेशन भेजता था। साथ ही ग्राहक ने किस रंग की शर्ट पहन रखी है, इसकी जानकारी भी दी जाती थी।
इसके बाद मुस्तकीम और सुलेमान बताए गए स्थान पर पहुंचते और शर्ट के रंग के आधार पर ग्राहक की पहचान कर नकली नोटों की गड्डी सौंपते थे। इस तरीके से गिरोह के सदस्यों को एक-दूसरे के बारे में ज्यादा जानकारी रखने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि ग्राहक से मिलने वाली असली रकम में से वे अपना कमीशन निकाल लेते थे। बची हुई रकम हारून के बताए QR कोड पर ऑनलाइन भेज दी जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी हर सप्ताह करीब दो बार नकली नोटों की डिलीवरी करते थे। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क ने लखनऊ में अब तक कितनी नकली करेंसी खपाई और इसके ग्राहक कौन-कौन हैं।
मोबाइल चैट से खुलेगा नेटवर्क का राज
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में लेकर उनकी कॉल डिटेल और चैट की जांच शुरू कर दी है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि हारून के अलावा गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
साथ ही पुलिस यह भी पता कर रही है कि नकली नोटों की आपूर्ति का मूल स्रोत कहां है और यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था। इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के बाद सामने आ सकते हैं।
पुलिस की जांच अब दिल्ली तक पहुंची
लखनऊ में दो भाइयों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। मुख्य आरोपी बताए जा रहे हारून की तलाश के अलावा पुलिस उन लोगों की पहचान भी कर रही है, जिन्हें कथित तौर पर नकली नोट सप्लाई किए गए।
फिलहाल बरामद नकली करेंसी और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क का पता लगाने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।