पंजाब की सियासत में ‘गुरु के बाज’ पर घमासान

हरसिमरत के दावे पर भगवंत मान का तंज; अकाली दल-AAP आमने-सामने

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चंडीगढ़, 04 सितंबर2026 । पंजाब की राजनीति में इन दिनों एक पक्षी ‘बाज’ को लेकर जमकर बयानबाजी हो रही है। शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच इस मुद्दे पर जुबानी जंग छिड़ गई है। मामला उस बाज से जुड़ा है, जिसे हरसिमरत कौर ने सुखबीर सिंह बादल पर हुए कथित हमले के बाद गुरु की ओर से सुरक्षा के संकेत के तौर पर देखा था।

नांदेड़ हमले के बाद हरसिमरत का दावा

दरअसल 13 अगस्त को नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर कथित हमले के बाद हरसिमरत कौर बादल ने एक बाज के दिखाई देने को धार्मिक आस्था से जोड़ दिया था। उनका दावा था कि गुरु ने सुखबीर की रक्षा के लिए अपना बाज भेजा था। उन्होंने कई रैलियों में सुखबीर के हाथ पर लगे गहरे घाव और टांकों की तस्वीरें भी दिखाईं। हरसिमरत ने बताया था कि उनके बच्चों ने अस्पताल के बाहर आसमान में लगातार एक बाज को चक्कर लगाते देखा। उन्होंने इसे गुरु की ओर से परिवार की रक्षा का संकेत बताते हुए कहा कि जब ‘बाजवाला’ उनकी रक्षा के लिए मौजूद है, तो उन्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं है।

नांदेड़ घटना के बाद सामने आया दावा

दरअसल, 13 अगस्त को नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर कथित हमला हुआ था। इसके बाद हरसिमरत कौर ने बताया कि उनके बच्चों ने अस्पताल के बाहर आसमान में एक बाज को लगातार चक्कर लगाते देखा। उन्होंने इसे गुरु गोबिंद सिंह की ओर से सुखबीर बादल और परिवार की रक्षा का संकेत बताया। हरसिमरत ने सार्वजनिक मंचों से इस घटना का जिक्र भी किया।

भगवंत मान ने कसा तीखा तंज

हरसिमरत कौर के इस दावे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पलटवार किया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अस्पताल के बाहर दिखाई देने वाला पक्षी जरूरी नहीं कि सुखबीर बादल की रक्षा के लिए आया हो। मान ने यह संभावना भी जताई कि पक्षी अपने अंडों या घोंसले की सुरक्षा के लिए वहां मंडरा रहा हो सकता है। उनके इस बयान के बाद मामला और राजनीतिक हो गया।

धार्मिक आस्था बनाम राजनीतिक तंज

इस पूरे विवाद में एक तरफ धार्मिक आस्था का पहलू है तो दूसरी तरफ राजनीतिक व्यंग्य। हरसिमरत कौर ने बाज को सिख परंपरा और गुरु से जुड़ी आस्था के संदर्भ में देखा, जबकि भगवंत मान ने इसी दावे को राजनीतिक कटाक्ष का विषय बना दिया। इससे AAP और अकाली दल के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव को नया मुद्दा मिल गया है।

पंजाब में बाज का धार्मिक महत्व

पंजाब में नॉर्दर्न गोशॉक को बाज के तौर पर विशेष महत्व प्राप्त है और इसे राज्य पक्षी का दर्जा दिया गया है। सिख परंपरा में बाज को शाही अधिकार, संप्रभुता और निडरता के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। गुरु गोबिंद सिंह से जुड़े चित्रों में बाज का उल्लेख और चित्रण इसकी धार्मिक-सांस्कृतिक अहमियत को और बढ़ाता है।

अकाली दल और AAP के बीच पुरानी राजनीतिक लड़ाई

बाज का विवाद अचानक सामने आया नया राजनीतिक टकराव जरूर है, लेकिन अकाली दल और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे हैं। हरसिमरत कौर पहले भी भगवंत मान सरकार की नीतियों और कामकाज को लेकर निशाना साधती रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री मान भी बादल परिवार और अकाली दल की पिछली सरकारों पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।

धार्मिक मुद्दों पर भी आमने-सामने

भगवंत मान ने बाज पर टिप्पणी करते हुए बेअदबी से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया। उनका सवाल था कि जिन घटनाओं को लेकर अकाली दल की सरकार के समय विवाद हुआ, उनके संदर्भ में अब गुरु के बाज को बादल परिवार की रक्षा से कैसे जोड़ा जा सकता है। इससे राजनीतिक बहस धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों तक पहुंच गई।

2027 चुनाव से पहले बढ़ेगा सियासी टकराव?

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की ओर बढ़ रहा है और ऐसे में अकाली दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर AAP सरकार अपने कामकाज और राजनीतिक पकड़ को लेकर जनता के बीच सक्रिय है। ऐसे में ‘बाज’ जैसे प्रतीकात्मक मुद्दे भी चुनावी राजनीति में बड़े विमर्श का हिस्सा बन सकते हैं।

फिलहाल ‘गुरु के बाज’ को लेकर हरसिमरत कौर और भगवंत मान के बीच बयानबाजी ने पंजाब की राजनीति में नया रंग भर दिया है। एक पक्ष इसे आस्था और सुरक्षा के संकेत के तौर पर देख रहा है, जबकि दूसरा इसे राजनीतिक व्यंग्य के जरिए चुनौती दे रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद कितना आगे बढ़ता है, यह दोनों दलों की अगली रणनीति और बयानों पर निर्भर करेगा।

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