नई दिल्ली, 02 सितंबर2026 । Special Intensive Revision (SIR) के तहत तैयार की गई नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में महिला और पुरुष मतदाताओं के बीच का अंतर काफी कम हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, जहां पहले महिला और पुरुष वोटर्स की संख्या में करीब 11.76 लाख का अंतर था, वहीं नई ड्राफ्ट सूची में यह अंतर घटकर लगभग 2.25 लाख रह गया है। मतदाता सूची में हुए इस बदलाव ने चुनावी प्रक्रिया और SIR अभियान को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
- आंकड़ों की छानबीन से पता चलता है कि ड्राफ्ट लिस्ट से पुरुषों के नाम अधिक संख्या में हटे हैं।
- साल 2025 में जहां पुरुष वोटर 83.49 लाख थे, वहीं अब घटकर 49.88 लाख रह गए हैं, जिसमें 40.25% की कमी दर्ज की गई है।
- इसके मुकाबले महिला वोटर्स की संख्या 71.73 लाख से घटकर 47.64 लाख हुई है, जो 33.59 % की गिरावट दिखाती है।
- पुरुषों की तुलना में महिलाओं की कम गिरावट के चलते वोटर लिस्ट में लिंग अनुपात में सुधार हुआ है।
- अब कुल वोटर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 48.85 प्रतिशत हो गई है, जो 2025 में 46.21 प्रतिशत थी।
- इसके साथ ही महिला और पुरुष वोटरों के बीच का अंतर 11.76 लाख से घटकर अब केवल 2.25 लाख रह गया है।
- SIR के ड्राफ्ट रोल से जुड़ा कोई सवाल आपके मन में है तो सवाल के साथ SIR लिखकर हमें 9220747220 पर वाट्सऐप करें, हम उसका जवाब एक्सपर्ट से लेकर छापेंगे।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया के दौरान मृत, स्थानांतरित या अपात्र मतदाताओं के नामों की पहचान करने के साथ-साथ नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया भी की जाती है। इसके लिए मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने विवरण की जांच करने और आवश्यकता होने पर सुधार या दावा-आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है।
महिला और पुरुष मतदाताओं के बीच अंतर में आई बड़ी कमी को मतदाता सूची में हुए बदलाव के महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे यह भी पता चलता है कि संशोधन की प्रक्रिया के दौरान महिला मतदाताओं से जुड़े आंकड़ों में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। हालांकि, केवल संख्या में अंतर कम होने के आधार पर किसी तरह की अनियमितता या निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए निर्वाचन प्रक्रिया और आधिकारिक आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण जरूरी है।
नई ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अब मतदाताओं के लिए अपने नाम और विवरण की जांच करना महत्वपूर्ण हो गया है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में नहीं है या उसके नाम, पते अथवा अन्य विवरण में गलती है, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित दावा या आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मतदाताओं को अपनी जानकारी समय रहते सत्यापित करने की सलाह दी जाती है।
SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी लगातार बहस देखने को मिल रही है। एक ओर इसे मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करने की कवायद बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में नई ड्राफ्ट लिस्ट में महिला-पुरुष मतदाताओं के अंतर में आई कमी का आंकड़ा राजनीतिक और चुनावी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम शामिल होते हैं और कितने नाम हटाए या संशोधित किए जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी। अंतिम सूची जारी होने के बाद ही यह पता चलेगा कि SIR के दौरान हुए बदलावों का मतदाता संख्या और महिला-पुरुष अनुपात पर वास्तविक प्रभाव कितना रहा।