UP में बिजली व्यवस्था पर बढ़ा दबाव, 62% फीडर घाटे में; समीक्षा में सामने आई विभाग की बड़ी चुनौती
लखनऊ, 02 सितंबर2026 । उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की वित्तीय और परिचालन स्थिति को लेकर हुई समीक्षा में बड़ी तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के करीब 62 प्रतिशत बिजली फीडर घाटे में चल रहे हैं। बड़ी संख्या में फीडरों का घाटे में होना बिजली वितरण व्यवस्था के साथ-साथ विभाग की आर्थिक स्थिति के लिए भी गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
कम घाटा दिखाने के भी आरोप
बैठक में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमिशन ने बिजली विभाग के दावों पर भी सवाल खड़े किए। मसलन नोएडा-4 में महज 3000 वैध कनेक्शन हैं, जबकि अवैध कनेक्शन 13 हजार हैं। कमिशन के मुताबिक हर कनेक्शन पर 2 हजार रुपये महीने का बिल हो तो साल भर में कुल बिल करीब 31 करोड़ बनता है, जबकि विभाग ने महज 8 करोड़ रुपये घाटा दिखाया। सूत्रों के अनुसार ऐसे मामलों में भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
बिजली वितरण व्यवस्था में फीडर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पावर सब स्टेशन से अलग-अलग क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने का काम फीडरों के माध्यम से होता है। किसी फीडर पर बिजली की आपूर्ति, खपत और राजस्व वसूली के आंकड़ों से यह आकलन किया जाता है कि संबंधित क्षेत्र में वितरण व्यवस्था कितनी प्रभावी है। ऐसे में बड़ी संख्या में फीडरों का घाटे में होना विभाग के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
समीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़े बिजली चोरी, लाइन लॉस, कम राजस्व वसूली और बिजली वितरण से जुड़ी अन्य चुनौतियों की ओर भी संकेत कर सकते हैं। हालांकि, किसी फीडर के घाटे में होने के पीछे केवल एक कारण नहीं होता। तकनीकी नुकसान, पुराने बिजली नेटवर्क, ट्रांसफॉर्मर से जुड़ी समस्याएं, कम बिलिंग और बकाया भुगतान जैसे कई कारक वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।
फीडरों के घाटे को कम करने के लिए बिजली विभाग को तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान पर नियंत्रण के साथ राजस्व वसूली में सुधार पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए बिजली चोरी रोकने, मीटरिंग व्यवस्था को मजबूत करने, खराब लाइनों और उपकरणों को बदलने तथा बकाया बिलों की वसूली जैसे कदम महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग लगातार महत्वपूर्ण स्तर पर बनी रहती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के साथ वितरण व्यवस्था को आर्थिक रूप से मजबूत रखना भी जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति तो हो रही हो, लेकिन उसके मुकाबले राजस्व वसूली कम हो, तो लंबे समय में इसका असर पूरे बिजली वितरण तंत्र पर पड़ सकता है।
अब समीक्षा के बाद विभाग की ओर से घाटे वाले फीडरों की स्थिति सुधारने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाती है, इस पर नजर रहेगी। खासतौर पर अधिक नुकसान वाले फीडरों की पहचान, बिजली चोरी पर कार्रवाई, लाइन लॉस कम करने और राजस्व बढ़ाने की दिशा में उठाए जाने वाले कदम अहम होंगे। 62 प्रतिशत फीडरों का घाटे में होना विभाग के सामने मौजूद चुनौती की गंभीरता को दर्शाता है और आने वाले समय में इसकी समीक्षा लगातार महत्वपूर्ण रहेगी।