पटना, 02 सितंबर2026 । बिहार में निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच NITI Aayog की Investment Friendliness Index 2026 रिपोर्ट ने राज्य के लिए बड़ी चुनौती सामने रखी है। रिपोर्ट में बिहार को 100 में 41.2 अंक मिले हैं और वह देश के 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 26वें स्थान पर रहा। बड़े राज्यों की श्रेणी में बिहार 17वें और अंतिम पायदान पर है।
चार कैटेगरी में बंटे राज्य, गोवा और गुजरात का दबदबा
रिपोर्ट में राज्यों के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। बिहार को 40 से 45 अंक वाली तीसरी श्रेणी में रखा गया है, जिसमें इसके साथ झारखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, नागालैंड और पुदुचेरी शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर, 50 से अधिक अंक हासिल कर उच्च प्रदर्शन करने वाले शीर्ष पांच राज्यों में गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु ने अपनी जगह बनाई है।
NITI Aayog ने पहली बार Investment Friendliness Index तैयार किया है, जिसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निवेश के लिए माहौल, बुनियादी ढांचे, कारोबारी वातावरण, सरकारी नीतियों, नियामकीय सुगमता और वित्तीय स्थिति जैसे पहलुओं का आकलन करना है। रिपोर्ट को राज्यों में निवेश के लिए बेहतर इकोसिस्टम विकसित करने और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए तैयार किया गया है।
गुजरात सबसे आगे, महाराष्ट्र और तमिलनाडु भी टॉप पर
निवेश अनुकूलता के मामले में गुजरात 56.6 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद महाराष्ट्र 53.7 और तमिलनाडु 53.3 अंकों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। ओडिशा और आंध्र प्रदेश भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हैं।
बिहार को रिपोर्ट में Emerging Performer श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि राज्य में कुछ क्षेत्रों में क्षमता और सुधार दिखाई दे रहा है, लेकिन निवेश आकर्षित करने के लिए अभी कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर काम करने की जरूरत है। बिहार की कुल रैंकिंग भले ही 26वीं है, लेकिन उसकी कुछ बुनियादी सुविधाओं को रिपोर्ट में अपेक्षाकृत मजबूत पक्ष माना गया है।
किन क्षेत्रों में बिहार को सुधार की जरूरत?
रिपोर्ट के अनुसार बिहार का प्रदर्शन इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों के मामले में अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। वहीं बिजनेस क्लाइमेट और वित्तीय सेहत ऐसे क्षेत्र हैं, जहां राज्य के लिए सुधार की काफी गुंजाइश है। रिपोर्ट में औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करने, निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने और बेहतर कारोबारी माहौल तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
बिहार की प्रमुख चुनौतियों में औद्योगिक बुनियादी ढांचे की कमी, छोटे शहरों की एयर कनेक्टिविटी, निर्बाध बिजली आपूर्ति, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के लिए बेहतर औद्योगिक माहौल तैयार करना शामिल है। NITI Aayog की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में एक मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने की जरूरत है, ताकि मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश को आकर्षित किया जा सके।
बिहार के लिए क्या है चुनौती?
बिहार की कम रैंकिंग ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में सरकार के सामने निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के साथ-साथ उद्योगों के लिए जमीन, कनेक्टिविटी, बिजली, कुशल श्रम और बेहतर कारोबारी वातावरण उपलब्ध कराने की चुनौती होगी।
NITI Aayog का यह सूचकांक बिहार के लिए केवल रैंकिंग नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों की पहचान का माध्यम भी है जहां सुधार करके राज्य अपनी निवेश क्षमता बढ़ा सकता है। यदि बुनियादी ढांचे के साथ कारोबारी माहौल, औद्योगिक सुविधाओं और निवेश प्रक्रियाओं में सुधार किया जाता है, तो बिहार भविष्य में देश के निवेश मानचित्र पर अपनी स्थिति बेहतर कर सकता है।