उम्रकैद की सजा के बावजूद मिलती रही सैलरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी भुगतान पर जताई हैरानी; जांच के आदेश

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प्रयागराज, 29 अगस्त 2026 । उम्रकैद की सजा पाए एक व्यक्ति को लगातार वेतन दिए जाने के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। अदालत यह जानना चाहती है कि सजा होने के बावजूद संबंधित व्यक्ति को किस आधार पर वेतन का भुगतान जारी रहा और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही।

हाईकोर्ट ने कहा कि जांच सिर्फ संबंधित पक्षों की ओर से दिए गए दस्तावेजों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स को संस्थान, अपने कार्यालय, ज्वाइंट डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन के कार्यालय, डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन और संबंधित अदालतों या अन्य अधिकारियों के पास मौजूद रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए।

14 साल जेल में गुजारने के बाद जमानत पर हुई रिहाई

यह याचिका बलिया के सिकंदरपुर स्थित उक्त विद्यालय के मैनेजमेंट ने दायर की थी। इसमें तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स के 14 मार्च, 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें असिस्टेंट टीचर सुधाकर शुक्ला को सैलरी के भुगतान के लिए सैलरी अकाउंट के सिंगल-ऑपरेशन की इजाजत दी गई थी। शुक्ला को सजा की अवधि में से 14 साल से ज्यादा समय काटने के बाद जमानत पर रिहा किया गया था।

मामले में यह भी जांच का विषय है कि संबंधित विभाग को व्यक्ति की सजा और उसके बाद की स्थिति की जानकारी थी या नहीं। यदि जानकारी होने के बावजूद भुगतान जारी रखा गया, तो यह सरकारी रिकॉर्ड और प्रशासनिक निगरानी में गंभीर चूक का मामला हो सकता है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब जांच में वेतन भुगतान से जुड़े दस्तावेज, सेवा रिकॉर्ड, विभागीय पत्राचार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि उम्रकैद की सजा के बावजूद वेतन भुगतान कैसे और क्यों जारी रहा तथा इसमें किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।

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