नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026 । दिल्ली की जेलों में बंद गैंगस्टर्स और हाई रिस्क कैदियों पर अब सुरक्षा एजेंसियां शिकंजा कसने की तैयारी में हैं। जेल प्रशासन ऐसे कैदियों की पहचान कर रहा है, जिनसे जेल के भीतर आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने, गैंग को निर्देश देने या सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा पैदा होने की आशंका है। ऐसे हाई रिस्क कैदियों को दिल्ली से बाहर दूसरे राज्यों की जेलों में स्थानांतरित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसका मकसद जेल सुरक्षा, कानून व्यवस्था और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए ऐसे कैदियों के अंतरराज्यीय स्थानांतरण को संभव बनाना और संगठित अपराध से निपटने में राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
पंजाब के संशोधित कानून को दिल्ली में लागू करने की तैयारी
इस कमी को दूर करने के लिए पंजाब सरकार ने ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स (पंजाब अमेडमेंट) एक्ट, 2025 पेश किया था। इसे 21 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। इसमें सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या जनहित के आधार पर विचाराधीन कैदियों को भी एक राज्य से दूसरे राज्य की जेल में भेजने का प्रावधान किया गया है। दिल्ली सरकार अब इसी संशोधित व्यवस्था को राजधानी में लागू करने का प्रस्ताव लाई है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य जेल के अंदर से गैंगस्टर नेटवर्क के संचालन पर रोक लगाना है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका रहती है कि प्रभावशाली गैंगस्टर जेल में रहते हुए भी अपने साथियों के संपर्क में रहकर आपराधिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में संवेदनशील कैदियों को अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित करने से उनके नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिल सकती है।
हाई रिस्क कैदियों की पहचान के दौरान उनके आपराधिक रिकॉर्ड, गैंग से संबंध, जेल के भीतर व्यवहार और सुरक्षा संबंधी जोखिम जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है। जिन कैदियों को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाएगा, उनके लिए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की जाएगी।
दूसरे राज्यों की जेलों में ट्रांसफर होने के बाद इन कैदियों की निगरानी और संपर्क व्यवस्था पर भी विशेष नजर रखी जा सकती है। इससे जेल से बैठकर गैंग चलाने और बाहर मौजूद सहयोगियों को निर्देश देने की संभावनाओं को कम करने की कोशिश होगी। दिल्ली की जेलों में पहले से बंद कई कुख्यात अपराधियों और गैंग से जुड़े कैदियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहती हैं। ऐसे में हाई रिस्क कैदियों का अंतरराज्यीय ट्रांसफर जेल सुरक्षा और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।