नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026 । MBBS में दाखिला दिलाने के नाम पर एक पूर्व आर्मी अधिकारी से करीब 90 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने और एडमिशन की प्रक्रिया पूरी कराने का भरोसा देकर पीड़ित से अलग-अलग चरणों में बड़ी रकम हासिल की। पीड़ित ने भरोसा करते हुए अपनी जमा पूंजी आरोपियों को सौंप दी, लेकिन निर्धारित समय पर न तो MBBS की सीट मिली और न ही रकम वापस की गई।
सफदरजंग अस्पताल में सरकारी सीट दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 90 लाख रुपये की डील हुई। पीड़ित ने रकम जुटाने के लिए अपना घर तक बेच दिया, पेंशन फंड लगाया और परिवार से उधार लिया। लेकिन दाखिला नहीं हुआ। अब कनॉट प्लेस थाना पुलिस ने शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर में हुई थी मुलाकात
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शिकायतकर्ता हरिद्वार के रहने वाले हैं और उनके बेटे ने NEET परीक्षा दी थी। शिकायत में बताया गया है कि आरोपी से 20 जुलाई 2025 को कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर में मुलाकात हुई थी। इसके बाद आरोपी ने खुद को डॉक्टर और NIMC से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए भरोसा दिलाया कि वह सफदरजंग अस्पताल में MBBS की सरकारी सीट दिलवा सकता है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपी 31 जुलाई 2025 से लगातार उनके संपर्क में था। पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
ताया जा रहा है कि आरोपियों ने मेडिकल कॉलेज में प्रभाव और संपर्क होने का दावा करते हुए पीड़ित को दाखिले का भरोसा दिलाया था। बातचीत के दौरान उसे विश्वास में लेकर फीस, सीट बुकिंग और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर रकम मांगी गई। पीड़ित द्वारा लाखों रुपये देने के बाद भी जब एडमिशन नहीं हुआ तो उसने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की।
आरोप है कि इसके बाद आरोपी टालमटोल करने लगे और पैसे लौटाने से भी इनकार कर दिया। मामले में शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस ठगी में कितने लोग शामिल हैं और क्या इसी तरीके से अन्य छात्रों या अभिभावकों को भी निशाना बनाया गया है।
मेडिकल कॉलेजों में MBBS सीटों की सीमित संख्या और दाखिले की प्रतिस्पर्धा का फायदा उठाकर ठग अक्सर अभिभावकों और छात्रों को निशाना बनाते हैं। सीट पक्की कराने, मैनेजमेंट कोटे में एडमिशन दिलाने या अधिकारियों से संपर्क होने का दावा कर बड़ी रकम मांगना ऐसे मामलों में आम तरीका माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल दाखिले से जुड़ा कोई भी भुगतान केवल अधिकृत प्रक्रिया और संस्थान की आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही किया जाना चाहिए। किसी व्यक्ति के निजी खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर करने या सीट की गारंटी के नाम पर नकद भुगतान करने से पहले पूरी तरह सत्यापन जरूरी है।